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आखिर एक महीने में दो बार क्यों रखा जाता है वट सावित्री का व्रत, जानिए इसके पीछे की मान्यता

सुहागिन महिलाओं द्वारा 26 मई को वट सावित्री का व्रत रखा जाने वाला है। हर साल महिलाएं ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के अगले दिन रखती है। आखिर इस व्रत का अमावस्या और पूर्णिमा की तिथि से क्या होता है मतलब।

  • By दीपिका पाल
Updated On: May 19, 2025 | 06:54 AM

वट सावित्री व्रत (सौ. सोशल मीडिया)

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हिंदू धर्म में सभी प्रकार के व्रत और त्योहार का महत्व होता है जहां पर तिथि के अनुसार मनाए जाते है। सुहागिन महिलाओं द्वारा 26 मई को वट सावित्री का व्रत रखा जाने वाला है। यह व्रत हर साल महिलाएं ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के अगले दिन रखती है। व्रत को पति की लंबी आयु के लिए महिलाओं द्वारा किया जाता है इस दौरान नियमों के साथ पूजा की जाती है।

पति की लंबी उम्र के अलावा यह व्रत वह महिलाएं भी करती है जो निसंतान है। व्रत के प्रभाव से उन्हें संतान की प्राप्ति हो सकती है। इस व्रत को एक महीने में दो बार रखा जाता है। अमावस्या और पूर्णिमा की वजह से इसके नियम बदलते है आखिर ऐसा क्यों चलिए जानते हैं आगे लेख में…

पुराणों में किया वर्णित

आपको बताते चलें कि, वट सावित्री व्रत को एक महीने में दो बार रखा जाता है इसे लेकर स्कंद और भविष्य पुराण में बताया गया है। इन पुराणों के अनुसार, वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिम को किया जाता है, वहीं निर्णयामृतादि के अनुसार, यह व्रत ज्येष्ठ माह कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि को किया जाता है। यानि कही जगह पर अमावस्या की तिथि तो कई जगहों पर पूर्णिमा की तिथि पर वट सावित्री व्रत रखा जाता है। कहा जाता हैं कि, भारत में अमावस्यांत और पूर्णिमानता ये दो मुख्य कैलेंडर प्रचलित हैं. इन दोनों के कैलेंडर में तिथि का अंतर होता है।

जानिए कहां किस तिथि पर रखते हैं व्रत

आपको बताते चलें कि, वट सावित्री का व्रत की तिथि दोनों के कैलेंडर पर निर्धारित होती है। पूर्णिमानता कैलेंडर के अनुसार, वट सावित्री व्रत जेष्ठ माह की अमावस्या को मनाया जाता है जिसे वट सावित्री अमावस्या व्रत कहा जाता है। अमावस्या की तिथि पर वट सावित्री व्रत उत्तर भारत, नेपाल और मिथिला के क्षेत्रों में रखा जाता है। इसके अलावा अमानता कैलेंडर के हिसाब से जेष्ठ माह की पूर्णिमा मनाता हैं, जिसे वट पूर्णिमा व्रत कहा जाता है। इस तिथि पर व्रत गुजरात और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में ज्येष्ठ पूर्णिमा पर वट सावित्री व्रत रखा जाता है।

ये भी पढ़ें- पहली बार ‘वट सावित्री व्रत’ कर रही महिलाएं जान लें पूजा के ये नियम, फलित होगी मनोकामनाएं

किन दो तिथि में रखा जाएगा वट सावित्री व्रत

वट सावित्री अमावस्या 26 मई 2025 को है। अमावस्या तिथि का प्रारम्भ 26 मई 2025 को दोपहर 12:11 बजे से होगा और समाप्ति 27 माई 2025 को सुबह 08:31 बजे होगी। इसके अलावा वट सावित्री पूर्णिमा 10 जून 2025 मंगलवार को है। पूर्णिमा तिथि का प्रारम्भ 10 जून 2025 को सुबह 11:35 बजे होगा और समाप्ति 11 जून 2025 को दोपहर 01:13 बजे होगी।

Why vat savitri fast celebrated on two dates of amavasya and purnima

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Published On: May 19, 2025 | 06:54 AM

Topics:  

  • Lifestyle News
  • Religion
  • Vat Savitri

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