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प्रदोष के दिन शाम को ही क्यों होती है भगवान शिव की पूजा? जानिए असली रहस्य

Lord Shiva Evening Worship: प्रदोष व्रत पर शाम को ही क्यों होती है भगवान शिव की पूजा? जानिए इसका रहस्य और शुभ समय, जिससे शिवजी तुरंत प्रसन्न होकर पूरी करें आपकी मनोकामना!

  • By सीमा कुमारी
Updated On: Jan 15, 2026 | 09:41 PM

भगवान शिव (सौ.सोशल मीडिया)

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Pradosh Vrat  Significance : भगवान शिव की उपासना के लिए प्रदोष व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के अनुसार, यह व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है। आमतौर पर किसी भी व्रत में पूजा हमेशा सुबह के समय होती है। लेकिन प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव का पूजन प्रदोष काल यानि शाम के समय किया जाता है। ऐसे में में आइए जानते हैं इसके पीछे छिपे रहस्य और महत्व के बारे में-

प्रदोष व्रत और शाम की पूजा का क्या है महत्व

धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। इस व्रत में भगवान शिव की पूजा विशेष रूप से शाम के समय की जाती है। जिसे प्रदोष काल कहा जाता है।

इसका मुख्य कारण यह है कि यह समय दिन और रात के मिलने का, यानी संधि काल होता है। इस दौरान ब्रह्मांडीय ऊर्जा सबसे अधिक सक्रिय रहती है, जिससे इस समय की गई पूजा का प्रभाव अत्यंत तीव्र और फलदायी माना जाता है।

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शाम की पूजा के प्रमुख कारण

शिव का तांडव

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर आनंद तांडव करते हैं। यह नृत्य उनकी प्रसन्नता का प्रतीक माना जाता है। इस समय की गई पूजा में भगवान शिव की कृपा तुरंत भक्तों पर आती है।

मनोकामना पूर्ति

इस शुभ समय में शिव और पार्वती की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट, रोग और दोष दूर होते हैं। साथ ही जीवन की इच्छाएं और मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।

ऊर्जा का सक्रिय होना

प्रदोष काल दिन और रात के मिलने का समय है, जब ब्रह्मांडीय ऊर्जा सबसे सक्रिय होती है। यही कारण है कि इस दौरान की गई पूजा का असर कई गुना बढ़ जाता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

सर्वोत्तम समय

शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा के लिए यह समय सबसे शुभ माना गया है। इस समय में की गई साधना भक्त के जीवन में अनंत सुख, सौभाग्य और कल्याण लाती है।

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प्रदोष काल का समय

प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले से शुरू होकर सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक रहता है। इसे शिव आराधना के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। इस समय दीपक जलाना, बेलपत्र अर्पित करना, जलाभिषेक और मंत्रों का उच्चारण विशेष फलदायी माना जाता है।

प्रदोष व्रत और शाम की पूजा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ देने वाला समय भी माना जाता है। भक्तों के अनुसार, सच्चे मन और श्रद्धा के साथ किया गया प्रदोष व्रत जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है।

Why shiva puja is performed in evening on pradosh vrat

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Published On: Jan 15, 2026 | 09:41 PM

Topics:  

  • Lord Shiva
  • Pradosh Vrat Muhurat
  • Religion

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