प्रदोष व्रत में किन बातों का रखें ध्यान? इन नियमों के पालन से ही महादेव दूर करेंगे सारे कष्ट

Pradosh Vrat Rules: शुक्रवार 16 जनवरी, को माघ मास का पहला प्रदोष व्रत है। इस व्रत में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जानें पूजा के नियम और विधि, जिससे महादेव प्रसन्न होकर दूर करेंगे आपके सारे कष्ट।
January Me Kab Hai Pradosh Vrat
भगवान भोलेनाथ (सौ.सोशल मीडिया)
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January Me Kab Hai Pradosh Vrat: भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। हिंदू भक्तों के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायक माना गया है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, जो भी भक्त सच्ची निष्ठा से भगवान भोलेनाथ को एक लोटा जल अर्पित करता है, उस पर महादेव की असीम कृपा होती है।

उसके जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं, मनचाही इच्छाएं पूरी होती है और धन-संपदा से लेकर जीवन में सकारात्मकता व सुख-समृद्धि आती है, क्योंकि शिव जी भाव के भूखे हैं और छोटी सी भक्ति से भी अत्यंत प्रसन्न हो जाते हैं।

इसी आस्था एवं विश्वास के चलते भक्त शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं, व्रत-उपवास रखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रदोष व्रत करते समय कुछ विशेष बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।

प्रदोष व्रत करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस व्रत के दौरान निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए जो इस प्रकार है-

समय का महत्व

प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में की जाती है। सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद का समय पूजा के लिए सबसे उत्तम होता है।

ब्रह्मचर्य का पालन

व्रत के दिन पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करें और शारीरिक व मानसिक शुद्धता बनाए रखें। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।

सात्विक आहार

इस व्रत में निराहार रहना सर्वोत्तम माना जाता है, लेकिन यदि संभव न हो तो फलाहार लिया जा सकता है। व्रत में अन्न, नमक, मिर्च और तामसिक भोजन (प्याज-लहसुन) का त्याग करना अनिवार्य है।

शिव अभिषेक

शाम की पूजा में भगवान शिव का गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक करें। उन्हें बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है।

क्रोध और वाद-विवाद से बचें

व्रत के दौरान किसी की निंदा न करें, झूठ न बोलें और मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें। अपना ध्यान 'ॐ नमः शिवाय' के जाप में लगाएं।

कथा का श्रवण करें

शाम की पूजा के समय प्रदोष व्रत की कथा अवश्य सुनें या पढ़ें, इसके बिना व्रत पूर्ण नहीं माना जाता।

पारण का समय

व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए।

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