Jambavan and there son (Source. Pinterest)
Jambavan Give Birth To Bali and Sugreev: रामायण से जुड़ी कथाओं में कई ऐसे प्रसंग हैं, जो आम लोगों को चौंका देते हैं। ऐसा ही एक अद्भुत रहस्य जुड़ा है जामवंत से। सवाल उठता है जामवंत किसके पुत्र थे? और क्या सच में वही बाली और सुग्रीव की ‘माँ’ बने थे? यह कथा आध्यात्मिक ग्रंथों में विस्तार से मिलती है, जो बेहद रोचक और रहस्यमयी है।
आध्यात्मिक रामायण के उत्तरकाण्ड में जामवंत के जन्म का संक्षिप्त वर्णन मिलता है। कथा के अनुसार, जामवंत स्वयं परमपिता ब्रह्मा के पुत्र थे। हालांकि सप्तऋषि, सनत्कुमार, प्रजापति और नारद भी ब्रह्मा के पुत्र माने जाते हैं, लेकिन वे उनके ‘मानस पुत्र’ थे अर्थात कल्पना से उत्पन्न।
जामवंत का जन्म अलग ढंग से हुआ। एक दिन ध्यान में लीन ब्रह्मा जी की आँखों से अश्रु बह निकले। उन्हीं आँसुओं से जामवंत प्रकट हुए। जन्म के बाद वे हिमालय पर्वत पर रहने लगे। उन्होंने सागर मंथन के समय देवताओं की ओर से वासुकि नाग को खींचने में सहयोग दिया और वामन अवतार की परिक्रमा भी की।
कथा यहीं खत्म नहीं होती। एक दिन हिमालय के एक सरोवर में अपना प्रतिबिंब देखकर जामवंत चौंक गए और जल में कूद पड़े। जब वे बाहर निकले तो एक रूपवती किशोरी में परिवर्तित हो चुके थे। उसी समय इंद्र की दृष्टि उन पर पड़ी। वे उस रूप पर मोहित हो गए और उनका तेज (वीर्य) उस स्त्री रूपी जामवंत के सिर के बालों पर गिरा। उससे बाली का जन्म हुआ क्योंकि वह बालों से उत्पन्न हुए थे, इसलिए उनका नाम बाली पड़ा।
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इसी दौरान सूर्यदेव भी वहाँ से गुजरे और उस दिव्य रूप को देखकर मोहित हो गए। उनका तेज उस स्त्री के ग्रीवा (गर्दन) पर गिरा, जिससे सुग्रीव का जन्म हुआ। ‘ग्रीवा’ से उत्पन्न होने के कारण उनका नाम सुग्रीव पड़ा। दोनों भाइयों के जन्म के बाद जामवंत का स्त्री रूप समाप्त हो गया और वे पुनः अपने मूल स्वरूप में आ गए।
ब्रह्मा जी के आदेश से किष्किंधा नगरी बसाई गई और बाली को उसका राजा बनाया गया। इस प्रकार जामवंत न केवल ब्रह्मा के पुत्र थे, बल्कि एक अनोखी लीला के माध्यम से बाली और सुग्रीव के जन्म का कारण भी बने। यह कथा दर्शाती है कि पौराणिक ग्रंथों में कई ऐसे रहस्य छिपे हैं, जो हमारी कल्पना से भी परे हैं।