रमज़ान इस्लाम का सबसे पाक महीना (सौ. AI)
Ramzan Ka Pavitra Mahina Kyon Mana Jata Hai: इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना रमजान अभी चल रहा है। दुनियाभर के मुसलमान इस महीने में रोजा रखकर नमाज अदा करते हैं और अल्लाह की इबादत में समय बिताते हैं। यह महीना आत्म-संयम, धैर्य, त्याग और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है।
रमज़ान का महत्व केवल उपवास रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्म-शुद्धि और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर भी माना जाता है। इस महीने में लोग सुबह सूर्योदय से पहले सहरी करते हैं और पूरे दिन भोजन व पानी से दूर रहते हैं। सूर्यास्त के बाद इफ्तार के साथ रोज़ा खोला जाता है। रोज़ा रखने का उद्देश्य केवल भूखे-प्यासे रहना नहीं, बल्कि अपने मन, वाणी और व्यवहार को भी नियंत्रित रखना होता है।
मुस्लिम धर्म गुरु के अनुसार, रमजान को इस्लाम धर्म में सबसे पवित्र यानी ‘पाक’ महीना माना जाता है। इसके पीछे कई धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक कारण हैं।
इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, इसी महीने की एक बरकत वाली रात जिसे ‘शब-ए-कद्र’ कहा जाता है, अल्लाह ने पैगंबर मोहम्मद पर पवित्र कुरान उतारने का सिलसिला शुरू किया था।
रमजान केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं है। यह महीना सिखाता है कि कैसे अपनी इच्छाओं पर काबू पाया जाए।
सुबह से शाम तक बिना कुछ खाए-पिए रहना इंसान को धैर्य और संयम सिखाता है।
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इस दौरान झूठ बोलना, गीबत (पीठ पीछे बुराई) करना और गुस्से पर काबू रखना अनिवार्य माना जाता है।
इस महीने को ‘इबादत का मौसम’ कहा जाता है। मुसलमान पांच वक्त की नमाज के अलावा रात में विशेष नमाज ‘तरावीह’ पढ़ते हैं। माना जाता है कि इस महीने में की गई इबादत का पुण्य (सवाब) अन्य महीनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाता है।
रमजान हमें उन लोगों के दर्द का एहसास कराता है जो गरीबी के कारण अक्सर भूखे रहते हैं। इसी एहसास के साथ मुसलमान अपनी संपत्ति का एक निश्चित हिस्सा ‘जकात’ (दान) के रूप में गरीबों को देते हैं, ताकि वे भी खुशी से ईद मना सकें।