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आखिर क्यों श्मशान की भस्म लगाकर मां पार्वती को ब्याहने पहुंचे थे महादेव? जानें इसके पीछे की अनसुनी कथा

Shiv Parvati Marriage Story: भगवान शिव को महादेव, भोलेनाथ और भस्मधारी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब शिव जी मां पार्वती से विवाह करने पहुंचे थे तब वे श्मशान की भस्म लगाए हुए थे।

  • Written By: प्रीति शर्मा
Updated On: Feb 15, 2026 | 08:12 AM

माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह दृश्य (सौ. सोशल मीडिया)

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Mahadev Parvati Vivah Katha: महाशिवरात्रि के इस पावन मौके पर अक्सर हमारे मन में यह सवाल आता है कि दुनिया के स्वामी होकर भी महादेव श्मशान की भस्म लगाकर और भूतों की बारात लेकर माता पार्वती को ब्याहने क्यों गए थे। यह कहानी जितनी दिलचस्प है उतनी ही गहरी सीख भी देती है।

क्यों महादेव बने अघोरी दूल्हा

भगवान शिव को अमरनाथ और मृत्युंजय कहा जाता है। उनके श्मशान की भस्म लगाने के पीछे एक बहुत सुंदर भाव है। शिव का अर्थ है कल्याण और श्मशान का अर्थ है अंत।

महादेव यह संदेश देना चाहते थे कि जहां दुनिया खत्म होती है वहाँ से मेरी भक्ति शुरू होती है। श्मशान की भस्म इस बात का प्रतीक है कि यह शरीर नश्वर है और अंत में सबको मिट्टी (राख) में ही मिलना है। महादेव ने इस भस्म को लगाकर यह दिखाया कि वे केवल देवताओं या इंसानों के ही नहीं बल्कि उन जीवों और आत्माओं के भी रक्षक हैं जिन्हें समाज अशुभ मानकर त्याग देता है।

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जब माता पार्वती की परीक्षा हुई

पौराणिक कथाओं के अनुसार जब महादेव अपनी बारात लेकर राजा हिमाचल के महल पहुंचे तो उनके साथ भूत, प्रेत, पिशाच और नंदी-भृंगी जैसे गण थे। महादेव का शरीर भस्म से ढका था गले में सांप थे और वे बैल पर सवार थे।

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माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह दृश्य (सौ. सोशल मीडिया)

हिमालय के नगरवासी और रानी मैना (पार्वती की माँ) इस रूप को देखकर डर गईं। रानी मैना तो पार्वती का हाथ महादेव को देने के लिए तैयार ही नहीं थीं। लेकिन माता पार्वती विचलित नहीं हुईं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि मैंने वैरागी शिव से प्रेम किया है उनके बाहरी रूप से नहीं।

इस कथा का असली संदेश

महादेव का अघोरी रूप यह बताता है कि असली प्रेम और भक्ति बाहरी चमक-धमक या सजावट की मोहताज नहीं होती। माता पार्वती ने शिव के गुणों और उनकी आत्मा से प्रेम किया था।

शिव की बारात में वो लोग थे जिन्हें कोई पसंद नहीं करता था (भूत-प्रेत)। महादेव का उन्हें साथ लेकर चलना यह दिखाता है कि ईश्वर की नज़र में कोई छोटा, बड़ा, कुरूप या डरावना नहीं है। वे सबको गले लगाते हैं।

महादेव का भस्म लगाकर ब्याहने जाना असल में मोह के अंत का उत्सव था। उन्होंने दिखाया कि गृहस्थ जीवन में प्रवेश करने के बाद भी वे भीतर से वही वैरागी रहेंगे जो संसार की हर वस्तु में समान भाव रखते हैं।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य मान्यताओं, धार्मिक ग्रंथों और सूचनात्मक उद्देश्यों पर आधारित है। Navbharatlive.com इसमें शामिल किसी भी तथ्य या जानकारी की सत्यता की पुष्टि या दावा नहीं करता है।

Why lord shiva applied ashes during marriage with parvati mysterious story

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Published On: Feb 15, 2026 | 08:12 AM

Topics:  

  • Dharma
  • Lord Shiva
  • Mahashivratri

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