नवरात्रि में गर्भवती महिला को काला धागा क्यों बांधा जाता है? जानिए इसके पीछे छिपा कारण

Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि के दौरान गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष नियम होते है। कहते है कि, गर्भवती महिला को काला धागा और काजल लगाया जाता है।
नवरात्रि में गर्भवती महिला को क्यों लगाते है काजल
नवरात्रि में गर्भवती महिला को क्यों लगाते है काजल (सौ. सोशल मीडिया)
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Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि का दौर चल रहा है। जहां पर आज नवरात्रि का चौथा दिन है जो माता कुष्मांडा को समर्पित होता है। माता के भक्त, मां भवानी को प्रसन्न करने के लिए पूजा-पाठ करते है तो वहीं पर कई नियम भी अपनाते है। नवरात्रि के दौरान गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष नियम होते है। कहते है कि, गर्भवती महिला को काला धागा और काजल लगाया जाता है।

यह नियम गर्भवती महिला और उसके बच्चे को बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से बचाने के लिए होता है। यहां पर काला धागा बांधने और अन्य नियमों को अपनाने के के पीछे क्या कारण जुड़ा होता है चलिए जानते है इसके बारे में।

गर्भवती महिला को काला धागा बांधने के नियम

यहां पर नवरात्रि में गर्भवती महिलाओं को बुरी नजर बचाने और बच्चे के स्वास्थ्य व सुरक्षित प्रसव के लिए काले धागे को पहना जाता है। इसके अलावा नियम में काजल भी लगाते है कहते है कि, बुरी नजर से बचाने और स्वास्थ्य लाभ के लिए यह नियम सही होता है। काला धागा बांधने को लेकर कहा जाता है कि, काला धागा एक शक्तिशाली ताबीज की तरह काम करता है और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है, जिससे गर्भवती महिला और होने वाले बच्चे की रक्षा होती है।यह शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और ऊर्जा को संतुलित रखता है। काला धागा बांधने से शनि देव की कृपा बनी रहती है और शनि के अशुभ प्रभावों से बचाव होता है। कहते है कि, पैरों में काला धागा पहनने से गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान होने वाले पैरों के दर्द से राहत मिलती है।

नवरात्रि में गर्भवती महिला को क्यों लगाते है काजल

नवरात्रि के दौरान गर्भवती महिला को नियम के अनुसार काजल लगाया जाता है। इसे लेकर माना जाता है कि, काजल लगाने से बच्चे की दृष्टि अच्छी होती है, आंखों की सुंदरता बढ़ती है और बुरी नजर से बचाव होता है। इसके वैसे कोई पारंपरिक और वैज्ञानिक कारण नहीं है लेकिन यह गंभीर परिणाम देता है। पुराने समय में बुजुर्ग, बच्चों को काला टीका कान के पीछे या बच्चों को माथे के कोने पर लगाते थे। इससे वे मानते थे कि, बुरी नजर नहीं लगेगी औऱ नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से सुरक्षित रहता है। स्वास्थ्य के नजरिए से बात करें तो, काजल लगाने से मन शांत रहता है और शारीरिक व मानसिक सुरक्षा मिलती है। नवरात्रि के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार, काजल का इस्तेमाल बच्चे को बुरी नजर से बचाने के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है।

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