आखिर हनुमान जी क्यों लेना पड़ा पंचमुखी अवतार (सौ.सोशल मीडिया)
Hanuman Janmotsav 2025: आज देशभर में हनुमान जयंती का पावन पर्व मनाया जा रहा है।राम भक्त हनुमान जी के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में हनुमान जन्मोत्सव का त्यौहार मनाया जाता है। यह जन्मोत्सव हर साल चैत्र माह के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
इस दिन भगवान मारुति नंदन के साथ ही भगवान राम और मां सीता की भी पूजा-अर्चना की जाती है। हनुमानजी को कलयुग में प्रत्यक्ष देव कहा गया है।
इसके अलावा, हनुमानजी को चिरंजिवी होने का आशीर्वाद प्राप्त है। इसलिए कलयुग में हनुमान जी की उपासना बेहद शुभ फलदायी मानी गई है। कहते हैं कि हनुमान जी को पंचमुखी अवतार लेना पड़ा था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर हनुमान जी को यह अवतार क्यों लेना पड़ा? ऐसे में आइए जानते हैं कि हनुमान जी के पंचमुखी अवतार से जुड़ा रहस्य क्या है?
आखिर हनुमान जी क्यों लेना पड़ा पंचमुखी अवतार जानिए
पौराणिक मान्यताओ के अनुसार, हनुमान जी के पंचमुखी अवतार का वर्णन अत्यंत रोचक और रहस्यमय बताया गया है। इस अवतार से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा राम-रावण युद्ध के दौरान घटित होती है। जब राम-रावण युद्ध चल रहा था, तो रावण को महसूस हुआ कि उसकी सेना हार की ओर बढ़ रही है।
तब उसने अपनी सहायता के लिए अपने मायावी और तंत्र विद्या में निपुण भाई अहिरावण को बुलाया। अहिरावण मां भवानी का परम भक्त था। उसने अपनी मायावी शक्तियों से भगवान राम, लक्ष्मण और पूरी वानर सेना को गहरी नींद में सुला दिया और राम-लक्ष्मण को अपहरण कर पाताल लोक ले गया।
वहां, अहिरावण ने मां भवानी को प्रसन्न करने के लिए पांच दिशाओं में पांच दीपक जलाए थे। उसे वरदान था कि जब तक ये पांच दीपक एक साथ नहीं बुझते, कोई उसे मार नहीं सकता।
हनुमान जी ने अपने प्रभु को बचाने के लिए पंचमुखी रूप धारण किया और एक साथ पांचों दीपकों को बुझाकर अहिरावण का वध कर दिया। इससे राम और लक्ष्मण मुक्त हो गए।
क्या है पंचमुखी हनुमान के पांचों मुख का महत्व
पंचमुखी हनुमान जी के पांचों मुख पांच अलग-अलग दिशाओं में हैं एवं इनके अलग-अलग महत्व हैं।
वानर मुख
यह मुख पूर्व दिशा में है तथा दुश्मनों पर विजय प्रदान करता है।
गरुड़ मुख
यह मुख पश्चिम दिशा में है तथा जीवन की रुकावटों और परेशानियों का नाशक है।
वराह मुख
यह मुख उत्तर दिशा में है तथा लंबी उम्र, प्रसिद्धि और शक्ति दायक है।
नृसिंह मुख
यह दक्षिण दिशा में है, यह डर, तनाव व मुश्किलें दूर करता है।
अश्व मुख
यह मुख आकाश की दिशा में है एवं मनोकामनाएं पूरी करता है।
हनुमान जयंती की खबरें जानने के लिए क्लिक करें-
ऐसे करें पंचमुखी हनुमान जी की पूजा
सुबह स्नान कर साफ और शुद्ध वस्त्र पहनें। इसके बाद पवित्र होकर हनुमान जी की पंचमुखी प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाएं। पंचमुखों की दिशा के अनुसार पंचोपचार पूजा करें (गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य). इसके बाद हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या पंचमुखी हनुमान कवच का पाठ करें। अंत में आरती करें और प्रसाद बांटकर पूजन का समापन करें।