महाशिवरात्रि के दिन क्यों चढ़ाते हैं शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और भांग? अब खुला रहस्य!
Mahashivratri Puja Samagri: महादेव को इस दिन अर्पित की जाने वाली वस्तुओं में बेलपत्र, धतूरा और भांग को सबसे खास माना जाता है। जानिए महाशिवरात्रि पर्व पर बेलपत्र, धतूरा और भांग चढ़ाने का क्या महत्व है।
- Written By: सीमा कुमारी
शिवलिंग( सौ.सोशल मीडिया)
Mahashivratri 2026: हर साल की तरह इस बार भी महाशिवरात्रि का पर्व पूरे देश में श्रद्धा, भक्ति और आस्था के साथ मनाया जाएगा। यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है और शिवभक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा-पाठ, व्रत, दान और मंत्रोच्चारण करते हैं।
साथ ही तरह-तरह की चीजें अर्पित करते हैं। महादेव को इस दिन अर्पित की जाने वाली वस्तुओं में बेलपत्र, धतूरा और भांग को सबसे खास माना जाता है। आइए जानिए महाशिवरात्रि पर्व पर बेलपत्र, धतूरा और भांग चढ़ाने का क्या महत्व है?
महाशिवरात्रि पर शिव पूजा में क्यों अर्पित किए जाते हैं ये चीजें
बेलपत्र
भगवान शिव की पूजा में तीन पत्तियों वाला बेलपत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि बेलपत्र की तीन पत्तियां भगवान शंकर के तीन नेत्रों का प्रतीक हैं। इसके अलावा, इसे त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश का भी प्रतीक माना जाता है। धार्मिक विश्वासों के अनुसार, शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने से तीन जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
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पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब भगवान शिव ने विषपान किया, तो उनके शरीर में अत्यधिक ताप उत्पन्न हो गया था। बेलपत्र में शीतलता के गुण होते हैं, इसलिए उनके शरीर की गर्मी शांत करने के लिए उन्हें बेलपत्र अर्पित किया गया। तभी से शिव पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व माना जाता है।
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धतूरा
धतूरा एक विषैला फल है, जिसे सामान्य रूप से न तो खाया जाता है और न ही अन्य देवताओं को अर्पित किया जाता है। लेकिन भगवान शिव धतूरे के फल और फूल दोनों को प्रसन्नता से स्वीकार करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, धतूरा अर्पित करने का अर्थ है अपने भीतर की कटुता, अहंकार, ईर्ष्या और नकारात्मक भावनाओं को भगवान शिव के चरणों में समर्पित करना। यह आत्मशुद्धि और त्याग का प्रतीक माना जाता है।
भांग
भांग को भगवान शिव का प्रिय प्रसाद माना जाता है। इसके पीछे पौराणिक के साथ-साथ औषधीय और ध्यान से जुड़ा महत्व भी बताया गया है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान जब भगवान शिव ने विष ग्रहण किया, तो उनके शरीर और मस्तिष्क पर उसका प्रभाव पड़ा। तब भांग और अन्य जड़ी-बूटियां उन्हें दी गईं, जिससे उनका मन शांत रहे। इसी कारण शिव पूजा में भांग का विशेष स्थान है।
