मार्च में इस दिन से क्यों बंद हो जाएंगे सारे शुभ काम? जानिए क्या है मीन संक्रांति 2026
Meen Sankranti 2026: मार्च में सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही मीन संक्रांति और खरमास की शुरुआत हो जाती है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों पर विराम लगाया जाता है।
- Written By: सीमा कुमारी
मीन संक्रांति (सौ.सोशल मीडिया)
Meen Sankranti 2026 Kab Hai: 15 मार्च को मीन संक्रांति का पावन पर्व मनाया जाने वाला है। हर संक्रांति का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन मीन संक्रांति को विशेष माना जाता है, क्योंकि इसी समय से एक ऐसा काल शुरू होता है जिसमें कई मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है।
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार मीन संक्रांति के बाद लगभग एक महीने तक विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाते है। ऐसे में आइए जानते हैं कि मीन राशि में सूर्य का गोचर कब होगा?
कब है मीन संक्रांति 2026
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष, 15 मार्च की सुबह 1 बजकर 8 मिनट पर सूर्य मीन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को ही मीन संक्रांति कहा जाता है। मीन राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति माने जाते हैं।
सम्बंधित ख़बरें
Lord Shiva Tattoo Design: शिव भक्तों के लिए बेस्ट हैं भगवान शिव से जुड़े ये 6 शानदार टैटू डिजाइन
Premanand Maharaj: सुबह की शुरुआत के लिए अपनाएं 10-10-10 का नियम, मिलेगा शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ
Sundar Kand Path Ke Niyam: घर में चल रही हैं परेशानियां? इन नियमों से करें सुंदर कांड पाठ, दूर होगी सारी पीड़ा
Bada Mangal 2026: जेठ का आखिरी बड़ा मंगल आज, हनुमान जी की कृपा पाने के लिए करें ये विशेष पूजा
इस कारण सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास की शुरुआत हो जाएगी, जो लगभग एक महीने तक रहता है। इसके बाद जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तब यह समय समाप्त होता है।
मीन संक्रांति का आध्यात्मिक महत्व
हिन्दू धर्म ग्रथों में मीन संक्रांति का आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। इस दिन स्नान, पूजा, ध्यान और दान का विशेष महत्व है, क्योंकि सूर्य की ऊर्जा से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
आखिर मीन संक्रांति से क्यों बंद हो जाते हैं शुभ एवं मांगलिक कार्य?
ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, सूर्य को ऊर्जा, तेज और मांगलिक कार्यों का प्रमुख कारक माना जाता है, लेकिन जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं तो उनकी गति और प्रभाव धीमा जाता है।
इस कारण इस अवधि को खरमास या मलमास कहा जाता है। इसके साथ ही धनु राशि भी गुरु की ही राशि है। यही कारण है कि साल में दो बार खरमास पड़ता है।
पहली बार मीन राशि में और दूसरी बार धनु राशि में सूर्य के गोचर से खरमास लगता है। ऐसा माना जाता है कि इस समय सूर्य की ऊर्जा कम प्रभावी होती है, इसलिए इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करना या कोई बड़ा मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए। हालांकि इस समय पूजा-पाठ, जप और दान जैसे धार्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है।
ये भी पढ़ें-नवरात्रि के पहले दिन कर लें ये 4 अचूक उपाय, मां दुर्गा करेंगी हर मनोकामना पूरी
क्या है इसकी पौराणिक कथा?
मान्यता है कि सूर्य देव का रथ सात घोड़े खींचते हैं। लगातार यात्रा करने से जब ये घोड़े थक जाते हैं, तो सूर्य देव कुछ समय के लिए रथ में घोड़ों की जगह गधों को जोड़ देते हैं। गधों की चाल धीमी होने के कारण इस अवधि में सूर्य की गति मंद मानी जाती है। इसी कारण इस समय को खरमास कहा जाता है। लगभग एक महीने बाद फिर से घोड़े रथ में जुड़ जाते हैं और शुभ कार्य दोबारा शुरू हो जाते हैं।
