सबसे पहले किसने किया था ‘हरतालिका तीज’ का व्रत, जानिए व्रत के क्या है नियम
Teej 2025: हिंदू मान्यता के अनुसार, हरतालिका तीज व्रत को सबसे माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए किया था। इसके बाद यह व्रत महर्षि वशिष्ठ की पत्नी अरुंधती ने विधि-विधान से किया।
- Written By: सीमा कुमारी
सबसे पहले किसने किया था 'हरतालिका तीज' का व्रत (सौ.सोशल मीडिया)
Hartalika Teej 2025: अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए हरतालिका तीज व्रत हर साल भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता हैं। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज व्रत महादेव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के प्रतीक के रूप में भी जाना जाता है, वह हर साल भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को जब चंद्रमा कन्या राशि और अपने ही नक्षत्र हस्त में विराजमान होता है तब यह व्रत प्रारंभ होता है।
सनातन परंपरा में भगवान शिव और पार्वती की पूजा के लिए समर्पित यह निर्जल व्रत बेहद कठिन माना जाता है। हिंदू लोक मतों के अनुसार, यह व्रत सुहागिन महिलाओं के द्वारा अपने पति की लंबी की आयु और अच्छे सेहत की कामना के लिए रखी जाती है।
हरतालिका तीज के व्रत के दिन सुहागिन स्त्रियां शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस व्रत को किन लोगों ने सबसे पहले किया और उन्हें क्या शुभ फल प्राप्त हुए? साथ ही साथ जानते हैं इस व्रत से जुड़े सभी जरूरी नियम भी।
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सबसे पहले कब और किसने किया हरतालिका तीज का व्रत
आपको बता दें, हिंदू मान्यता के अनुसार, हरतालिका तीज व्रत को सबसे माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए किया था। इसके बाद यह व्रत महर्षि वशिष्ठ की पत्नी अरुंधती ने विधि-विधान से किया।
कहा जाता है कि, हरतालिका तीज के पुण्य फल से उन्होंने अपने पति के साथ ऋषियों में सबसे ऊंचा स्थान प्राप्त किया। आकाश में तारे के रूप उन्हें आज भी अपने पति के साथ देखा जा सकता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत करने से ही इंद्राणी को जयंत जैसी तेजस्वी संतान प्राप्त हुई। मान्यता ये भी है कि रोहिणी ने इसी व्रत के पुण्य प्रभाव से चंद्रमा की 27 पत्नियों में मुख्य स्थान प्राप्त किया था। वह चंद्रमा की सबसे प्रिय पत्नी बनीं।
जानिए क्या है हरतालिका तीज व्रत के नियम
महिलाओं के द्वारा रखा जाने वाला यह व्रत कठिन व्रतों में से एक है, जिसे बगैर कुछ खाए-पिए सूर्योदय से सूर्यास्त तक रखा जात है।
विशेष परिस्थितियों को यदि छोड़ दिया जाए तो इस व्रत को एक बार प्रारंभ करने के बाद आजीवन किया जाता है।
अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद दिलाने वाले इस व्रत को बीमार और गर्भवती महिलाओं को निर्जल और निराहार रखने से बचना चाहिए।
पीरियड में इस व्रत को करने को किया जा सकता है। सिर्फ इस दौरान देवी-देवताओं को स्पर्श या फिर कहें उनका पूजन नहीं किया जाता है।
हरतालिका तीज के दिन किसी सुहागिन स्त्री को श्रृंगार की सामग्री दान करने पर शुभ फल की प्राप्ति होती है।
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हरतालिका तीज व्रत का व्रत करने वाली महिलाओं को अगले दिन शुभ मुहूर्त में इस व्रत का पारण करना चाहिए।
