साल 2025 की फाल्गुन पूर्णिमा की सही तिथि, विशेष मुहूर्त में स्नान-दान की क्या है विशेष महिमा, यहां पढ़ें
फाल्गुन पूर्णिमा हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में पूर्णिमा के दिन शुभ मुहूर्त में स्नान-दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। तो यहां जानिए फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि और स्नान-दान मुहूर्त के बारे
- Written By: सीमा कुमारी
फाल्गुन पूर्णिमा (सौ.सोशल मीडिया)
Falgun Purnima 2025: सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से फाल्गुन पूर्णिमा, जो खासतौर पर फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष यह पूर्णिमा 13 मार्च 2025 को रखा जाएगा।
पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के साथ ही चंद्रमा की पूजा का भी विधान है। पूर्णिमा के दिन शुभ मुहूर्त में स्नान-दान करने से धन-धान्य में कई गुना अधिक वृद्धि होती है। वहीं, जिनकी कुंडली में चंद्र दोष है वो पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की उपासना और सफेद चीजों का दान जरूर करें।
ऐसा करने से चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। साथ ही चंद्र दोष से भी छुटकारा मिलता है। तो आइए अब जानते हैं कि फाल्गुन माह की पूर्णिमा कब मनाई जाएगी।
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फाल्गुन पूर्णिमा 2025 डेट और स्नान-दान मुहूर्त जानिए
फाल्गुन माह में आने वाली पूर्णिमा का खास महत्व है, क्योंकि इसी दिन रंगों का त्यौहार होली भी मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार, फागुन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 13 मार्च 2025 को सुबह 10 बजकर 35 मिनट पर होगा।
पूर्णिमा तिथि का समापन 14 मार्च को दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा 14 मार्च को मनाई जाएगी। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय का समय शाम 6 बजकर 57 मिनट रहेगा। वहीं फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत 13 मार्च 2025 को रखा जाएगा।
फाल्गुन पूर्णिमा पर पूजा विधि
- फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत हों।
- इसके बाद गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें।
- यदि संभव हो तो गंगा स्नान भी कर सकते हैं।
- इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें।
- अब पंचोपचार कर श्री सत्यनारायण जी की पूजा करें।
- सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ करें।
- पूजा के समय भगवान विष्णु को पीले रंग के फल और फूल अर्पित करें।
- पूजा का समापन भगवान विष्णु की आरती से करें।
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