नवंबर में इस दिन है सौभाग्य सुंदरी तीज, जानिए क्यों किया जाता है यह व्रत
Sundari Vrat Kya Hota Hai:पंचांग के अनुसार, हर साल मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को यह व्रत किया जाता है। सौभाग्य सुंदरी व्रत भगवान शंकर और माता पार्वती को समर्पित है।
- Written By: सीमा कुमारी
सौभाग्य सुंदरी तीज व्रत (सौ.सोशल मीडिया)
Saubhagya sundari vrat 2025: हिंदू धर्म में सुहागन महिलाओं के द्वारा कई तीज-त्योहार मनाए जाते है। कजरी तीज से लेकर हरतालिका तीज का विशेष महत्व होता है। आपको बता दें, इन तीनों तीज के अलावा एक और तीज भी मनाई जाती है, जिसे सौभाग्य सुंदरी तीज कहते हैं।
इस साल यह तीज शनिवार, 8 नवंबर 2025 को मनाई जा रही हैं। यह तीज हर साल अगहन मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। जिसे सौभाग्य सुंदरी व्रत के नाम से जाना जाता हैं।
यह व्रत देवों के देव कहे जाने वाले भगवान शिव और पार्वती के नाम से विख्यात देवी गौरी की पूजा से जुड़ा है। इस दिन विवाहित और अविवाहित महिलाएं सुख-समृद्धि की कामना करते हुए विधि-विधान से व्रत रखती हैं।
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हिंदू मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानें इसकी पूजा विधि और सही तिथि के बारे में-
सौभाग्य सुंदरी तीज व्रत कब मनाया जाएगा?
सौभाग्य सुंदरी तीज व्रत मार्गशीर्ष माह, यानी अगहन माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाया जाएगा। यह शुभ तिथि शनिवार, 8 नवंबर 2025 को पड़ेगी। यह व्रत विवाहित और अविवाहित दोनों महिलाएं सुख, समृद्धि और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से रखती हैं।
सौभाग्य सुंदरी व्रत पूजा विधि
- सौभाग्य सुंदरी के दिन सुबह उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें।
- इसके बाद नौ ग्रहों की पूजा करें।
- भगवान शिव और माता पार्वती की एक साथ पूजा करें।
- माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की चीजें और रोली, कुमकुम, चावल व सुपारी अर्पित करें।
- भगवान शिव को बेलपत्र, जल, धतूरा आदि अर्पित करें।
- फिर समस्त शिव परिवार की पूजा करें और आरती करें।
- पूजा करने के बाद दान-पुण्य करें।
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सौभाग्य सुंदरी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार सौभाग्य सुंदरी व्रत से वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। यदि आपकी कुंडली में मांगलिक दोष है तो इस व्रत को करने से वह भी कम होता है। यदि किसी कन्या के विवाह में अड़चन आ रही हो तो इस व्रत को करने से सभी बढ़ाएं दूर हो जाती हैं।
