Ravan Gold Lanka (Source. Pinterest)
The Truth About The Golden Lanka: रामायण में जब भी लंका का नाम आता है, तो ज़्यादातर लोगों के मन में “सोने की लंका” की तस्वीर उभर आती है। आम धारणा यही है कि रावण की नगरी सोने से बनी हुई थी, जहां हर महल, हर सड़क और हर इमारत स्वर्ण जड़ी थी। लेकिन धार्मिक ग्रंथों और विद्वानों की व्याख्या कुछ और ही कहानी कहती है। असल में लंका सोने की नहीं, बल्कि अपने समय की सबसे उन्नत और समृद्ध नगरी थी।
रामायण में प्रयुक्त शब्द ‘स्वर्ण लंका’ का अर्थ शाब्दिक रूप से सोने से बनी नगरी नहीं है। संस्कृत और प्राचीन साहित्य में ‘स्वर्ण’ शब्द का उपयोग अक्सर वैभव, समृद्धि और उत्कृष्टता के लिए किया जाता था। यानी ‘स्वर्ण लंका‘ का मतलब था एक ऐसी लंका जो धन, ज्ञान, विज्ञान और स्थापत्य कला में सबसे आगे थी।
कथाओं के अनुसार लंका उस युग की एक हाई-टेक सिटी जैसी थी। वहां सुव्यवस्थित सड़कें, भव्य महल, जल निकासी की बेहतर व्यवस्था और सुरक्षा के मजबूत इंतज़ाम थे। रावण स्वयं महान विद्वान, शिव भक्त और कुशल प्रशासक था। उसकी राजधानी में शिक्षा, आयुर्वेद, खगोल विज्ञान और वास्तु शास्त्र का उच्च स्तर देखने को मिलता था।
लंका की इमारतों में सोने का प्रयोग सीमित रूप में आभूषण या सजावट के लिए हो सकता है, लेकिन पूरी नगरी का सोने से बना होना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं माना जाता। विद्वानों का मत है कि लंका की समृद्धि इतनी अधिक थी कि उसे ‘स्वर्ण’ की उपमा दी गई। यही कारण है कि समय के साथ यह धारणा आम लोगों में ‘सोने की लंका’ के रूप में प्रचलित हो गई।
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आज भी हम कहते हैं “उसकी तो सोने की लंका जल गई”, जिसका मतलब होता है अत्यधिक समृद्धि का नाश। यह कहावत भी इसी तथ्य की ओर इशारा करती है कि लंका सोने से नहीं, बल्कि ऐश्वर्य और शक्ति से भरी हुई थी, जो अधर्म के कारण नष्ट हो गई।
लंका की कहानी हमें यह सिखाती है कि केवल विकास और वैभव ही काफी नहीं होता। जब शक्ति के साथ धर्म और मर्यादा न हों, तो सबसे उन्नत सभ्यता भी विनाश की ओर बढ़ जाती है। रावण की लंका इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।