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‘ज्येष्ठ अमावस्या’ की सही तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त नोट कर लें, ऐसे करें पूजा, कष्टों से मिलेगी मुक्ति

धार्मिक दृष्टि से ज्येष्ठ अमावस्या का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है और पितृ दोष से भी छुटकारा मिलता है।

  • By सीमा कुमारी
Updated On: May 17, 2025 | 01:53 PM

ऐसे करें ज्येष्ठ अमावस्या की पूजा (सौ.सोशल मीडिया)

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ज्येष्ठ अमावस्या सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस बार ज्येष्ठ अमावस्या 27 मई को मनाई जाएगी। कहते हैं इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करके दान-पुण्य के कार्य करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन पितरों की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण और भोजन करवाना भी बेहद शुभ माना गया है। इस अमावस्या पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

ज्योतिषयों के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या का संबंध शनि देव से भी है, क्योंकि इस दिन शनि देव का जन्म हुआ था। यही कारण है कि इसे शनि जयंती और शनि अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से शनि देव की पूजा और उनसे संबंधित उपाय करने के लिए शुभ माना जाता है। आइए, जानते हैं इस साल ज्येष्ठ अमावस्या की तिथि और मुहूर्त के बारे में।

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क्या है ज्येष्ठ अमावस्या 2025 तिथि व मुहूर्त

आपको बता दें, ज्येष्ठ अमावस्या 27 मई 2025, मंगलवार को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि का प्रारंभ 26 मई 2025 को दोपहर 12:11 बजे से होगा और इसका समापन 27 मई 2025 को रात 08:31 बजे होगा।

ऐसे करें ज्येष्ठ अमावस्या की पूजा

  • ज्येष्ठ अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करें। यदि ऐसा संभव न हो तो घर पर
  • ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और फिर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • फिर पितरों की शांति के लिए पिंडदान व तर्पण करें।
  • यदि संभव हो तो इस अमावस्या पर तीर्थ स्नान जरूर करें। कहते हैं ऐसा करने से अक्षय पुण्य की
  • प्राप्ति होती है और पितृ दोष से भी छुटकारा मिल जाता है।
  • इसके बाद पीपल के पेड़ पर जल, अक्षत, सिंदूर आदि चीजें चढ़ाएं साथ ही दीपक भी जरूर जलाएं
  • और पेड़ की कम से कम 11 या 7 बार परिक्रमा करें।
  • इस दिन शनि मंदिर जाकर शनिदेव को सरसों का तेल, काले तिल, काला कपड़ा और नीले फूल अर्पित करें।

ज्येष्ठ अमावस्या का क्या है महत्व

धार्मिक दृष्टि से ज्येष्ठ अमावस्या का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है और पितृ दोष से भी छुटकारा मिलता है।

इस तिथि पर पितरों को तर्पण और पिंडदान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे न केवल पितरों की शांति मिलती है, बल्कि व्यक्ति को भी पुण्य की प्राप्ति होती है और उसके जीवन में समृद्धि और सुख-शांति का वास होता है।

 

When jyeshtha amavasya in the year 2025

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Published On: May 17, 2025 | 01:53 PM

Topics:  

  • Lifestyle News
  • Religion
  • Shani Jayanti

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