जन्माष्टमी के बाद ‘इस’ दिन मनाई जाएगी भगवान श्रीकृष्ण की छठी, जानिए क्यों मनाई जाती है छठी
Krishna Chhathi: सनातन धर्म में श्रीकृष्ण छठी पूजा का बहुत अधिक महत्व है। ऐसी मान्यता है कि, इस दिन षष्ठी देवी की पूजा करने से बच्चा का स्वस्थ अच्छा रहता है। आइए जानते है कब है श्रीकृष्ण की छठी।
- Written By: सीमा कुमारी
कब है श्रीकृष्ण की छठी (सौ.सोशल मीडिया)
Krishna Chhathi kb hai 2025: 16 अगस्त 2025 को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानि जन्माष्टमी का पावन पर्व पूरे देश भर में मनाया जा रहा है। इसकी तैयारियां भारत सहित अन्य देशों में भी जोरो-शोरों से चल रही है। हर साल भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि पर श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है।
हिंदू शास्त्रों के अनुसार, श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व के तुंरत 6 दिन बाद श्रीकृष्ण छठी मनाई जाती है। हिंदू धर्म में बच्चे के जन्म के 6 दिन बाद जिस तरह से छठी पूजा की जाती है। ठीक उसी प्रकार भगवान कृष्ण छठी मनाई जाती है। इस बार भगवान श्रीकृष्ण की छठी 22 अगस्त शुक्रवार को मनाई जाएगी।
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के मंदिरों को सजाया जाता है और बेहद उत्साह के साथ भगवान श्रीकृष्ण की छठी मनाई जाती है। इस वर्ष कुछ लोगों में भगवान श्रीकृष्ण की छठी की डेट को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है। ऐसे में आइए जानते हैं इस पर्व की सही डेट और अन्य जानकारी के बारे में।
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कब है साल 2025 श्री कृष्ण की छठी
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, 2025 में देशभर में 16 अगस्त 2025 को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इसलिए 2025 में श्री कृष्ण की छठी 22 अगस्त 2025 शुक्रवार को मनाई जाएगी। बता दें, साल 2025 में श्री कृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त को है।
अष्टमी तिथि 09:50 से शुरू 15 अगस्त को रात्रि 09:34 बजे अष्टमी तिथि समाप्त होगी। हिंदू तिथि के अनुसार अष्टमी तिथि 16 अगस्त 2025 को है। लेकिन भगवान श्री कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त को मनाई जाएगी।
आखिर क्यों मनाई जाती है श्री कृष्ण की छठी जानिए
छठी श्री कृष्ण के आगमन की खुशी का उत्सव है जो भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, किसी घर में बच्चे के जन्म के 6 दिन बाद छठी मनाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि, इस दिन षष्ठी देवी की पूजा करने से बच्चा का स्वस्थ अच्छा रहता है। षष्ठी देवी को बच्चों की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। उनकी कृपा से राजा प्रियव्रत के मृत पुत्र को पुनर्जीवित किया गया था। इसी के कारण बच्चे के जन्म के छह दिन बाद छठी पूजा की जाती है। इसलिए सनातन धर्म में छठी पूजा का विशेष महत्व होता है।
कैसे करें श्रीकृष्ण छठी की पूजा
- श्रीकृष्ण की छठी पूजन के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए।
- चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर प्रभु को विराजमान करें।
- इसके बाद लड्डू गोपाल का पंचामृत से स्नान करें और नए वस्त्र पहनाकर स्थापित करें।
- इसके बाद लड्डू गोपाल को रोली या पीले चंदन का तिलक करें।
- साथ ही फूल माला अर्पित करें और दीपक जलाकर आरती करें।
- कान्हाजी को माखन मिश्री के साथ कढ़ी चावल का भोग लगाएं।
- उसके बाद सभी में प्रसाद का वितरण करें।
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सनातन धर्म में श्रीकृष्ण छठी का महत्व
सनातन धर्म में श्रीकृष्ण छठी पूजा का बहुत अधिक महत्व है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, किसी घर में बच्चे के जन्म के 6 दिन बाद छठी मनाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि, इस दिन षष्ठी देवी की पूजा करने से बच्चा का स्वस्थ अच्छा रहता है। षष्ठी देवी को बच्चों की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। इसी के कारण बच्चे के जन्म के छह दिन बाद छठी पूजा की जाती है। इसलिए सनातन धर्म में छठी पूजा का विशेष महत्व होता है।
