2025 में ‘गुड़ी पड़वा’ की सही तिथि को लेकर कन्फ्यूज़न ख़त्म, जानिए सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और इस पर्व का महत्व
सनातन धर्म में गुड़ी पड़वा पर्व का खास महत्व है। इस दिन से हिंदू नववर्ष शुरू हो जाता है। यह त्योहार महाराष्ट्र में बड़े उमंग और उत्साह के साथ मनाया जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल गुड़ी पड़वा का पर्व कब है।
- Written By: सीमा कुमारी
गुड़ी पड़वा (सौ.सोशल मीडिया)
Gudi Padwa 2025: हिन्दू धर्म में व्रत और त्यौहारों का अपना अलग ही महत्व है। जिनमें से एक महत्वपूर्ण पर्व गुड़ी पड़वा भी है। जो हर साल चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है और इसे हिंदू नववर्ष की शुरुआत के रूप में माना जाता है। इस साल गुड़ी पड़वा का पावन पर्व रविवार 30 मार्च को मनाया जाएगा।
गुड़ी पड़वा का पावन पर्व देश भर में बहुत ही धूमधाम एवं हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। लेकिन, महाराष्ट्र और कोंणक क्षेत्र में गुड़ी पड़वा के पर्व में खासा उत्साह देखा जाता है। आपको बता दें, गुड़ी पड़वा मराठी हिंदुओं के लिए पारंपरिक नए साल का प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
ऐसे में आइए जानते हैं कि इस वर्ष गुड़ी पड़वा कब मनाया जाएगा और इसका पूजा का शुभ मुहूर्त क्या होगा –
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कब है गुड़ी पड़वा
पंचांग के अनुसार, गुड़ी पड़वा यानी चैत्र माह शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 29 मार्च को शाम 4 बजकर 27 मिनट पर होगी। वहीं तिथि का समापन 30 मार्च को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, इस बार गुड़ी पड़वा का पर्व रविवार 30 मार्च को मनाया जाएगा।
क्या है गुड़ी पड़वा की पूजा विधि जानिए
सबसे पहले गुड़ी पड़वा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करलें। इसे बाद पूरे घर की अच्छे से साफ-सफाई करने के बाद घर के मुख्य द्वार को आम के पत्ते की तोरण लगाएं और घर को रंगोली से सजाएं।
अब घर के किसी एक हिस्से में गुड़ी लगाएं और उसे फूलों से सजाएं। गुड़ी पड़वा के दिन पूरे परिवार के साथ विधि- विधान पूर्वक ब्रह्मा जी पूजा करें। तत्पश्चात गुड़ी फहराने के बाद भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें।
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गुड़ी पड़वा का महत्व
धार्मिक दृष्टिकोण से गुड़ी पड़वा त्योहा का बड़ा महत्व है। इसके साथ ही, यह पर्व जीवन में शुभता और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। गुड़ी पड़वा के शुभ अवसर पर घरों में गुड़ी (विजय पताका) स्थापित की जाती है, जो समृद्धि का प्रतीक होती है। बता दें, इस दिन से चैत्र नवरात्रि का आरंभ होता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना गुड़ी पड़वा के दिन की थी, इसलिए इस दिन ब्रह्मा जी की पूजा का विशेष महत्व है।
