
प्रतिकात्मक तस्वीर (सौजन्य सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क: भगवान विष्णु के दसवें अवतार कहे जाने वाले कल्कि भगवान की जयंती हर साल सावन महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। इस बार कल्कि जयंती 10 अगस्त, शनिवार को यानी आज मनाई जा रही है। अभी कल्कि अवतार नहीं हुआ है बावजूद इसके हिन्दू धर्म को मानने वाले कल्कि जयंति मनाते हैं। धर्म-शास्त्रों के अनुसार कलियुग में भी भगवान विष्णु अवतार लेंगे और बुराईयों का अंत करेंगे।
हिंदू धर्म ग्रंथों में चार युगों के बारे में बताया गया है। सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग। कलियुग सबसे आखिरी होगा जिसमें धरती पर पाप बढ़ जाएगा। धर्म-शास्त्रों के अनुसार पाप और पापियों का अंत करने के लिए ही भगवान विष्णु कल्कि के रूप में 10वां अवतार लेंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कल्कि कहां और कब अवतार लेंगे और इनका स्वरूप कैसा होगा। आइए कल्कि जयंति पर जान लेते हैं कि हिंदू धर्म ग्रंथों में कल्कि अवतार के बारे में क्या लिखा गया है।
हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन भगवान कल्कि की जयंती मनाई जाती है और विधि-विधान से पूजा-उपासन की जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी दिन कल्कि का जन्म होगा।
हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार कल्कि भगवान विष्णु के 10वें अवतार होंगे जो कलियुग में पाप औप पापियों का अंत करने के लिए धरती पर अवतरित होंगे। श्रीमद्भगवत पुराण में इसको लेकर विस्तृत विवरण है। इसके अनुसार घोर कलियुग में जब धरती पर अत्यधिक पाप बढ़ जाएगा तब भगवान विष्णु कल्कि अवतार लेंगे जो 64 कलाओं से युक्त होगा। कल्कि सफेद घोड़े पर सवार होकर पापियों का अंत करेंगे और धरती पर फिर से धर्म की स्थापना करेंगे। इस तरह कलियुग का अंत होगा और फिर से सतयुग शुरू होगा।
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार कल्कि का जन्म कलियुग में भारत देश में उत्तर प्रदेश राज्य के संभल जिले में होगा। एक परम श्रीहरि भक्त के घर में कल्कि जन्म लेंगे। यह एक ब्राह्मण परिवार का घर होगा।






