मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाए जाने का रहस्य खुला, किसने दिया 'खिचड़ी' नाम, दही-चूड़ा खाने की ये है ख़ास वजह

मकर संक्रांति पर स्नान और दान की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसके अलावा, इस दिन घरों में खिचड़ी बनाई जाती है और खिचड़ी का दान भी दिया जाता है। मान्यता है कि इस दिन खिचड़ी बनाने और खाने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाए जाने का रहस्य खुला, किसने दिया 'खिचड़ी' नाम, दही-चूड़ा खाने की ये है ख़ास वजह
मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का क्या है महत्व,(सौ.सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति का पावन त्योहार भगवान सूर्य देव को समर्पित है। यह त्योहार हर साल पौष माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। इसी दिन से खरमास खत्म होता है और शुभ व मांगलिक कार्यों जैसे शादी, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश आदि की शुरुआत होती है।

इस बार 14 जनवरी, दिन मंगलवार को पूरे देशभर में मनाया जाएगा। मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख और विशेष पर्व है। नए साल पर मकर संक्रांति हिंदू धर्म का पहला त्योहार होता है।

आपको बता दें, मकर संक्रांति पर स्नान और दान की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसके अलावा, इस दिन घरों में खिचड़ी बनाई जाती है और खिचड़ी का दान भी दिया जाता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि मकर संक्रांति में खिचड़ी ही क्यों बनाई जाती है कोई और पकवान क्यों नहीं बनता है। ऐसे में आइए बताते हैं आपको इसके पीछे की रोचक कहानी-

मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का क्या है महत्व

एक कहानी के अनुसार, मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने की परंपरा के पीछे एक दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है। कहते हैं कि जब खिलजी ने भारत पर आक्रमण किया था, उस समय नाथ योगी युद्ध लड़ रहे थे। लगातार युद्ध के कारण उन्हें खाने का समय नहीं मिल पाता था और वे काफी कमजोर हो गए थे।

उस समय गुरु गोरखनाथ ने सभी को दाल, चावल और सब्जियां मिलाकर एक साथ पकाने को कहा। इस तरह खिचड़ी बनी। यह भोजन जल्दी बन जाता था और खाने में भी आसान था। नाथ योगियों ने इस खिचड़ी को खाकर नई ऊर्जा प्राप्त की और युद्ध लड़ने लगे। तब से ही मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने और खाने की परंपरा चली आ रही है।

बाबा गोरखनाथ की सलाह से नाथ योगियों ने दाल, चावल और सब्जी को मिलाकर एक नया पकवान बनाया। इस पकवान को उन्होंने खिचड़ी नाम दिया। यह भोजन जल्दी पक गया और युद्ध में थके हुए योगियों को ताकत मिली। खिलजी को हराने के बाद नाथ योगियों ने मकर संक्रांति के दिन उत्सव मनाया और इस नए पकवान, खिचड़ी को सबके साथ बांटा। तब से ही मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाने और बांटने की परंपरा शुरू हो गई। यह परंपरा आज भी जारी है और खिचड़ी को एक पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन माना जाता है।

क्यों लगाया जाता है मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा का भोग

मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा का भी विशेष महत्व है। इसे भगवान सूर्य को भोग लगाने की परंपरा है। मान्यता है कि दही-चूड़ा खाने से रिश्ते मजबूत होते हैं और सौभाग्य मिलता है। खिचड़ी के साथ भी दही-चूड़ा चढ़ाया जाता है।

बता दें, हिंदू धर्म में दही-चूड़ा को शुभ माना जाता है। कई राज्यों में मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा खाने की प्रथा है। यह सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि दही-चूड़ा स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है। इसमें कई पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखते हैं।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com