वैशाख में किस दिन है शिवरात्रि? नोट कीजिए सटीक तिथि और मुहूर्त
Vaishakh Shivratri: वैशाख माह में आने वाली शिवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान शिव (सौ.AI)
Vaishakh Shivratri Kab Hai 2026: सनातन धर्म में जिस प्रकार प्रदोष व्रत का महत्व है। ठीक उसी प्रकार मासिक शिवरात्रि व्रत का भी है। भगवान शिव को समर्पित मासिक शिवरात्रि व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाता है। इस बार वैशाख महीने का पहला मासिक शिवरात्रि व्रत 15 अप्रैल 2026 को रखा जाने वाला है।
मासिक शिवरात्रि व्रत का क्या है? आध्यात्मिक महत्व
मासिक शिवरात्रि प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को रखा जाने वाला एक पावन व्रत है, जो भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए समर्पित है। यह व्रत आत्मशुद्धि, मानसिक शांति, और कामना पूर्ति जैसे विवाह बाधा, कष्ट निवारण के लिए रखा जाता है, जो भक्तों को हर महीने शिव भक्ति में लीन होने का विशेष अवसर देता है।
कब रखा जाएगा? वैशाख महीने का पहला मासिक शिवरात्रि व्रत
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 15 अप्रैल 2026 को रात 10 बजकर 31 मिनट पर होगा। चतुर्दशी तिथि का समापन 16 अप्रैल को रात 8 बजकर 11 मिनट पर होगा। निशिता काल के अनुसार, वैशाख माह में मासिक शिवरात्रि का व्रत 15 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा।
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वैशाख मासिक शिवरात्रि पूजा मुहूर्त 2026
मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा के लिए मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 50 मिनट से सुबह 5 बजकर 36 मिनट तक रहेगा।
- गोधूलि मुहूर्त :सुबह 6 बजकर 55 मिनट से 7 बजकर 18 मिनट तक।
- अमृत काल: सुबह 7 बजकर 37 मिनट से रात 9 बजकर 10 मिनट तक।
- वहीं निशिता मुहूर्त: रात 12 बजकर 15 मिनट से देर रात 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा।
मासिक शिवरात्रि की पूजा के लिए निशिता मुहूर्त अति उत्तम माना जाता है।
मासिक शिवरात्रि व्रत की पूजा विधि क्या है?
- मासिक शिवरात्रि व्रत के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान करें।
- साफ कपड़े पहनें।
- हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
- शिवलिंग का सबसे पहले जल और फिर पंचामृत से अभिषेक करें।
- भगवान शिव को बिल्व पत्र, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, सफेद चंदन, अक्षत, और सफेद फूल चढ़ाएं।
- माता पार्वती को सुहाग की सामग्री, लाल वस्त्र और फूल चढ़ाएं।
- शिव जी के वैदिक मंत्रों का जप करें।
- शिवरात्रि व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।
- निशिता काल के समय में भी पूजा जरूर करें और अगले दिन सुबह व्रत का पारण करें।
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भगवान शिव पूजन मंत्र
ॐ नमः शिवाय ॥
शिव गायत्री मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
