इस दिन है तुलसीदास जी की 527 वीं जयंती, जानिए पत्नी प्रेमी से कैसे बने महान रामभक्त
इस साल 11 अगस्त 2024 को तुलसीदास जी की 527 वीं जन्म वर्षगांठ मनाई जाएगी। इस महान कवि ने धार्मिक महाकाव्य ‘रामचरितमानस’ की रचना की जो विश्वभर में प्रसिद्ध है और हिन्दुओं की आस्था का प्रतीक है।
- Written By: रीना पंवार
प्रतिकात्मक तस्वीर (सौजन्य सोशल मीडिया)
विश्व प्रसिद्ध धार्मिक महाकाव्य‘रामचरितमानस’ के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की जयंती इस वर्ष 11 अगस्त, रविवार के दिन मनाई जाएगी। इस महान कवि एवं विद्वान की जयंती हर साल श्रावण कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार, इस दिन तुलसीदास जी का जन्म हुआ था। तुलसीदास जी का नाम भारत के महान कवियों और विद्वानों में आता है।
महान कवि तुलसीदास जी ने श्रीरामचरित मानस के अलावा कवितावली, दोहावली, दुर्गाशप्त सती, हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक, हनुमान बाहुक, गीतावली, विनयपत्रिका और जानकीमंगलम जैसे ग्रंथों की रचना की है।
उन्होंने यूं तो कुल 12 पुस्तकों की रचना की थी, लेकिन इन सभी में उनकी ‘रामचरितमानस’ पुस्तक सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हुई। तुलसीदास जी ने इस धार्मिक ग्रंथ की रचना अवधि भाषा में की थी, जिससे हर कोई इसे सरलता से समझ सके। इसलिए ही तुलसीदास जी की जयंती के शुभ अवसर पर लोग रामचरितमानस का पाठ करते हैं। ऐसे में आइए जान लीजिए इस साल तुलसीदास जयंती मनाने का दिन और शुभ-मुहूर्त कब रहेगा।
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तुलसीदास जयंती तिथि
इस साल 11 अगस्त 2024 को तुलसीदास जी की 527 वीं जन्म वर्षगांठ मनाई जाएगी। सप्तमी तिथि का प्रारम्भ 11 अगस्त 2024 को 5:44 सुबह होगा और इसकी समाप्ति 12 अगस्त 2024 को 7:55 सुबह पर होगी।
ऐसे करें तुलसीदास जी की पूजा
इस खास दिन पर ‘रामचरितमानस’के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी की पूजा के साथ ही राम दरबार की पूजा की जाती है। इस दिन पूजा शुरू करने से पहले भगवान की प्रतिमा के आगे घी का दीपक जलाएं। फिर प्रसाद चढ़ाएं और इसके बाद तुलसीदल अवश्य चढ़ाएं। फिर तुलसी की माला से रामचरितमानस दोहे और चौपाई का कम से कम 108 बार जाप करें। इस दिन रामचरितमानस पढ़ना बेहद शुभ माना जाता है। इसलिये साधक रामचरितमानस का पाठ जरूर करें।
तुलसीदास ऐसे बने राम भक्त
तुलसीदास जी के महान राम भक्त बनने के पीछे एक रोचक कथा है। इस पौराणिक कथा के अनुसार तुलसीदास जी अपनी पत्नी से अत्यधिक प्रेम करते थे। एक बार तुलसीदास जी की पत्नी मायके चली गई। इस पर पत्नी वियोग में तुलसीदास जी भी उनके पीछे-पीछे चल दिए। इस बात पर उनकी पत्नी अत्यधिक क्रोधित हुई और तब पत्नी रत्नावली ने तुलसीदास को धिक्कारते हुये कहा “लाज न आई आपको दौरे आएहु नाथ, अस्थि चर्म मय देह यह, ता सों ऐसी प्रीति ता। नेकु जो होती राम से, तो काहे भव-भीत बीता।
अर्थात- ‘हड्डी और मांस के इस शरीर से इतना प्रेम। अगर इतना ही प्रेम तुमने राम से किया होता तो ये जीवन सुधर जाता।
पत्नी के इस ताने से तुलसीदास जी का अंतर्मन जाग उठा और फिर उन्होंने अपना सारा जीवन श्रीराम की भक्ति में व्यतीत किया। इसी भक्ति के कारण उन्होंने महान धार्मिक महाकाव्य‘रामचरितमानस’की रचना की जो विश्वभर में प्रसिद्ध है।
लेखिका- सीमा कुमारी
