नवंबर में इस दिन है तुलसी विवाह, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसकी महिमा
Tulsi Vivah:तुलसी विवाह न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह प्रेम, समर्पण और सच्ची निष्ठा का प्रतीक है। इस दिन की गई पूजा, कथा श्रवण और परंपरा का पालन घर में सुख-शांति और सौभाग्य लाता है।
- Written By: सीमा कुमारी
तुलसी विवाह 2025 डेट और शुभ मुहूर्त (सौ.सोशल मीडिया)
Tulsi Vivah Kaise Karen 2025: धार्मिक एवं ज्योतिष दृष्टि से सनातन धर्म में तुलसी पूजन का बहुत अधिक महत्व है। घर में तुलसी का पौधा होना शुभ माना जाता है, क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही इसमें देवी लक्ष्मी का वास भी होता है। वहीं, हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि के दिन तुलसी विवाह मनाया जाता है।
पंचांग के अनुसार, इस साल 02 नवंबर को तुलसी विवाह मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के बाद योगनिद्रा अवस्था से उठते है। जिसके बाद हर जगह शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। जिस वजह से भक्त तुलसी विवाह को बड़े उत्साह के साथ मनाते है। ऐसे में आइए जानते है इस साल कब मनाई जाएगी तुलसी विवाह और शुभ मुहूर्त,नियम
ये रहने वाला है तुलसी विवाह 2025 डेट और शुभ मुहूर्त
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि की शुरुआत 02 नवंबर को सुबह 07 बजकर 31 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 03 नवंबर को सुबह 05 बजकर 07 मिनट पर होगी। ऐसे में 02 नवंबर को तुलसी विवाह मनाया जाएगा।
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कैसे करें तुलसी विवाह की पूजा
- शास्त्रों के अनुसार, तुलसी विवाह के दिन घर की अच्छी तरीके से साफ-सफाई कर लें।
- इसके बाद तुलसी के पौधे को पवित्र स्थान पर रखें।
- फिर उनको श्रृंगार के रूप में लाल कपडे़ पहनाएं, कुमकुम लगाएं और फूल,हल्दी-चूड़ा आदि चढ़ाएं।
- इसके बाद शालीग्राम को तुलसी के बाएं और रख दें, फिर तुलसी पर जल चढ़ाकर सिंदूर लगाएं, हल्दी, पुष्प और मिठाई के साथ 16 श्रृंगार को भी अर्पित करें. पूजा के अंत में आरती कर प्रसाद ग्रहण करें।
जानिए क्या है सनातन धर्म में तुलसी विवाह का महत्व
तुलसी विवाह न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह प्रेम, समर्पण और सच्ची निष्ठा का प्रतीक है। इस दिन की गई पूजा, कथा श्रवण और परंपरा का पालन घर में सुख-शांति और सौभाग्य लाता है। यह विवाह धार्मिक दृष्टि से शुभ विवाहों की शुरुआत मानी जाती है। इस दिन कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए व्रत करती हैं।
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तुलसी विवाह कराना, स्वयं विवाह कराने जितना पुण्यफलदायी माना गया है। तुलसी और शालिग्राम के इस मिलन को धर्म और प्रकृति के संगम के रूप में भी देखा जाता है।
