भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है यूपी का यह मंदिर, रक्षाबंधन पर होता है खास नजारा
Bijnor Temple: यूपी के बिजनौर जिले में अनोखा मंदिर स्थित है जिसे भाई-बहन का मंदिर कहा जाता है। रक्षाबंधन पर इस मंदिर में भारी भीड़ नजर आती है तो वहीं पर अलग ही नजारा देखने के लिए मिलता है।
- Written By: दीपिका पाल
यूपी में अनोखा भाई-बहन का मंदिर (सौ. सोशल मीडिया)
Bijnor Temple: सावन महीने का दौर चल रहा है। इस महीने में कई व्रत और त्योहार मनाए जा रहे है। भाई-बहन के प्यार का प्रतीक यानि रक्षाबंधन 9 अगस्त को मनाया जाने वाला है। यह सभी बड़े त्योहारों में से एक होता है। रक्षाबंधन के मौके पर बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर जीवन में खुशहाली और दीर्घायु होने की कामना करती है।
शायद आप जानते नहीं होगे, उत्तरप्रदेश के बिजनौर जिले में एक ऐसा अनोखा मंदिर स्थित है जिसे भाई-बहन का मंदिर कहा जाता है। रक्षाबंधन के मौके पर इस मंदिर में भारी भीड़ नजर आती है तो वहीं पर अलग ही नजारा देखने के लिए मिलता है।
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जानिए क्या है इस मंदिर की खासियत
आपको इस मंदिर की खासियत बताते चलें तो, उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के हल्दौर में भाई-बहन का अनोखा मंदिर स्थित है। यहां पर रक्षाबंधन के पावन पर्व के दिन लोग मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना करते करते है। इस मंदिर में सतयुग के जमाने से ही मूर्तियां स्थापित है। नवविवाहित भी इस मंदिर में दर्शन करने के लिए पहुंचते है। इस मंदिर में हर साल रक्षाबंधन के दिन विशाल मेले का साथ भंडारे का आयोजन होता है. लोग यहां विभिन्न देवी-देवताओं के दर्शन करने के साथ-साथ इन दोनों बहन-भाई की मूर्ति के समक्ष भी माथा टेकते हैं। इस मंदिर की मान्यता को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि, इस मंदिर में दर्शन करने आने वाले भक्तों की मनोकामना पूरी होती है।
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मंदिर से जुड़ी है कहानी
इस मंदिर से जुड़ी कहानी प्रचलित है। हल्दौर से जब एक भाई अपनी बहन को लेकर जा रहा था, तो रास्ते में डाकुओं ने उन्हें घेर लिया था. जब डाकू की बुरी नजर बहन पर पड़ी. तब भाई ने देवी-देवताओं का स्मरण करते हुए खुद को पत्थर में तब्दील करने की प्रार्थना की। ग्रामीण राज बताते हैं कि भगवान ने उनकी प्रार्थना सुन ली और दोनों ही पत्थर में तब्दील हो गए। तब से यहां दोनों बहन-भाई की पत्थर की मूर्ति के रूप में पूजा होती है। यहां मूर्तियां सतयुग से ही विराजमान है. ऐसे में मंदिर में दर्शन करने के लिए बिजनौर ही नहीं बल्कि आस-पास के जिलों के लोग भी आते हैं. यह मंदिर जंगल के बीच बना हुआ है।
