Shri Premanand Ji Maharaj (Source. Pinterest)
Naam Japa Benefits: “ऐसे लोग हमेशा कमजोर और असफल होते हैं!” श्री प्रेमानंद जी महाराज, यह वाक्य आज के समय में भक्ति और धर्म के नाम पर हो रही दिखावेबाज़ी पर गहरा सवाल खड़ा करता है। श्री प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, अगर शिष्य गुरु के वचनों पर चल नहीं पाता, तो यह उसका सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। गुरु के शब्द ईश्वर के अचूक बाण जैसे होते हैं अगर शिष्य उन पर सवार हो जाए, तो बिना अपनी शक्ति लगाए भी वह माया के सागर को पार कर सकता है। लेकिन देह-अहंकार और कच्चे धर्म से भरा मन इस सत्य को स्वीकार नहीं कर पाता।
महाराज जी सावधान करते हैं कि “कच्चा धर्मी” बनने का खतरा सबसे बड़ा है। ऐसे लोग धर्म की बातें तो बहुत करते हैं, लेकिन उसके रहस्य को नहीं समझते। इनकी पहचान साफ होती है:
एक सच्चे साधक को गुरु और संतों के सामने अत्यंत विनम्र और सावधान रहना चाहिए। अगर गुरु मुस्कुराकर बात करें, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए यही कृपा का क्षण होता है। यदि शिष्य यह मान ले कि गुरु के रूप में स्वयं राधारानी विराजमान हैं, तो उसका जीवन तेज़ी से बदलने लगता है। संतों की सभा में ऊँचा आसन मिल जाए, तब भी अहंकार नहीं करना चाहिए। धन, पद या प्रभाव के आधार पर आगे बैठना कच्चे धर्म का लक्षण है। सच्चे संत वे हैं जिन्होंने काम, क्रोध, लोभ और अहंकार को जीत लिया है।
बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो न पूरी तरह संसार के रहते हैं, न प्रभु के। ये हमेशा चिड़चिड़े, क्रोधित और कटु स्वभाव के होते हैं। मीठे बोल बोलकर भीतर द्वेष रखने वालों से सतर्क रहना चाहिए। भक्ति कोई नाटक या रंगमंच नहीं है। इंद्रियों के गुलाम रहकर भक्त का वेश पहनने से रस की प्राप्ति नहीं होती।
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महाराज जी बताते हैं कि जीवन की आँधियों और प्रारब्ध से बचने का एक ही मार्ग है पूर्ण समर्पण।
गुरु-वाणी की शरण में रहिए, कच्ची भक्ति वालों की संगति से बचिए और प्रिय-प्रेम में डूब जाइए यही सच्चे आध्यात्मिक जीवन का रंग है।