
वट सावित्री व्रत(सौ. फाइल फोटो)
हिंदू धर्म मे हर व्रत और त्योहार का महत्व होता है जिसे लोग प्रसन्नता के साथ मनाते है। सुहागिन महिलाओं द्वारा वैसे तो कई व्रत रखे जाते है लेकिन वट सावित्री व्रत इसमें सबसे खास व्रत होता है। यह व्रत 26 मई को रखा जाने वाला है। इस खास व्रत को महिलाएं अक्सर अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखती है। इस व्रत को करने से भगवान की कृपा आप पर बनी होती है।
वट सावित्री व्रत के वैसे तो कई नियम है लेकिन पूजा की सामग्री में सभी चीजों का होना जरूरी होता है। वट सावित्री व्रत पर पूजा की थाली में बांस की टोकरी या पंखे का होना महत्व रखता है।
यहां पर बांस की टोकरी और पंखे का महत्व समझें तो, दोनों चीजों का पूजा में होना जरूरी होता है।बांस के पंखे का उपयोग व्रति द्वारा पूजा के दौरान किया जाता है, जबकि टोकरी में व्रति द्वारा चढ़ाए जाने वाले फल और अन्य सामग्री रखी जाती है। इन दोनों वस्तुओं का उपयोग व्रत को पूर्णता प्रदान करता है और इसे अधूरा मानना गलत है।
वट सावित्री व्रत में वट वृक्ष की महिमा सबसे खास होती है।धार्मिक मान्यता में वट वृक्ष को त्रिदेवों का प्रतीक माना जाता है. जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और डालियों में शिव का वास होता है। इसलिए वट वृक्ष की पूजा से सभी भगवान का आशीर्वाद मिल जाता है। यह तो धार्मिक महत्व हुआ है लेकिन इसके पीछे एक वैज्ञानिक महत्व भी जुड़ा है। जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और डालियों में शिव का वास होता है. अतः इसकी पूजा से सभी देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।
यहां पर वट सावित्री की विधिपूर्वक पूजा करने का महत्व होता है। कहते हैं कि, नियत तिथि पर सुहागिन महिलाएं नियमपूर्वक वट वृक्ष की पूजा कर सकते है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। व्रत के दौरान विशेष रूप से बांस के पंखे और टोकरी का उपयोग करके पूजा की जाती है, जिससे यह व्रत और भी विशेष बन जाता है। यहां पर पूजा करने से महत्व काफी होता है।






