पापमोचनी एकादशी के दिन महिलाएं बाल धोएं या नहीं? जानिए क्या है परंपरा और इसके नियम
March Ekadashi 2026: पापमोचनी एकादशी के दिन महिलाओं के बाल धोने से जुड़ी परंपरा और नियमों को जानिए। इस दिन बाल न धोने के पीछे धार्मिक और शारीरिक दोनों कारण बताए गए हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान विष्णु (सौ. Gemini)
Ekadashi Par Baal Done Chahiye Ya Nahi:धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से एकादशी तिथि का सनातन धर्म में सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस साल 2026 में पापमोचनी एकादशी का पावन पर्व 15 मार्च को मनाया जा रहा है। धार्मिक ग्रथों में बताया गया है कि, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत रखने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे मानसिक शांति तथा आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
लेकिन, इस दिन को लेकर अक्सर लोगों के मन में एक बड़ा सवाल रहता है कि क्या एकादशी के दिन बाल धोने चाहिए या नहीं? अक्सर घर के बड़े-बुजुर्ग इस दिन बाल धोने, नाखून काटने या साबुन का इस्तेमाल करने से मना करते हैं। ऐसे में आइए जानते है इस बात में कितनी सच्चाई है?
आखिर एकादशी के दिन बाल क्यों नहीं धोने चाहिए
अहिंसा और जीव-हत्या से बचाव
शास्त्रों के अनुसार, सिर धोते समय पानी के साथ सिर पर मौजूद सूक्ष्म जीव मर सकते हैं। एकादशी व्रत में अहिंसा का पालन अनिवार्य होता है, इसलिए इन जीवों की अनजाने में हत्या से बचने के लिए बाल धोना वर्जित माना जाता है।
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आंतरिक शुद्धि और भक्ति पर ध्यान
एकादशी का दिन भगवान विष्णु की भक्ति और आंतरिक शुद्धि का दिन है। इस दिन बाहरी श्रृंगार, जैसे बाल धोना या सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग, विलासिता माना जाता है और भक्ति व साधना में ध्यान भटक सकता है।
अगर बाल धोना बहुत जरूरी हो तो क्या करें
अगर बाल धोना बहुत जरूरी हो, तो सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप एकादशी से एक दिन पहले, यानी दशमी तिथि को ही बाल धो लें। ऐसा करने से आप एकादशी के दिन शास्त्रों का पालन करते हुए स्वच्छ और तैयार रहेंगे।
एकादशी का दिन भगवान विष्णु की भक्ति और आंतरिक शुद्धि का होता है, इसलिए इस दिन बाल धोना या अन्य श्रृंगारिक गतिविधियाँ वर्जित मानी जाती हैं। धर्म हमें कठिनाई में नहीं डालता बल्कि अनुशासन और भक्ति की राह सिखाता है, इसलिए आवश्यक होने पर पहले ही दिन साफ-सफाई कर लेना सर्वोत्तम उपाय है।
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शास्त्रों में क्या कहा गया है
शास्त्रों में एकादशी के नियमों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। पद्म पुराण के क्रियायोगसार खंड में कहा गया है कि व्रती को इस दिन दातुन और बाल धोने से बचना चाहिए। वहीं, विष्णु पुराण के अनुसार एकादशी के दिन संयम, सात्विक आहार और भक्ति का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
शास्त्र मानते हैं कि जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ व्रत करता है, उसे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और उसके जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
