Vaibhav Lakshmi: शुक्रवार को माता वैभव लक्ष्मी की पूजा में इन बातों का करें पालन, बनेंगे सुख-समृद्धि के योग!
Vaibhav Lakshmi Vrat Vidhi: माता वैभव लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है। इस लेख में जानिए पूजा के सही नियम, विधि और वैभव लक्ष्मी मंत्र ।
- Written By: सीमा कुमारी
माता वैभव लक्ष्मी (Source. Pinterest)
Vaibhav Lakshmi Puja Tips: हिन्दू धर्म में शुक्रवार का दिन धन, ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी की पूजा- अर्चना के लिए समर्पित है। इस दिन मां लक्ष्मी के वैभव लक्ष्मी स्वरूप की पूजा का विधान है। धर्म ग्रथों में बताया गया है कि, जो भक्त पूरी श्रद्धा और सही नियमों के साथ वैभव लक्ष्मी व्रत रखता है, उसके घर में कभी भी अन्य- धन की कमी नही होती है और घर में सुख-शांति का वास होता है।
हालांकि, वैभव लक्ष्मी का व्रत जितना फलदायी है, इसके नियम उतने ही कठिन हैं। पूजा के दौरान की गई एक छोटी सी गलती व्रत के पुण्य फल को खत्म कर सकती है।
मां वैभव लक्ष्मी की पूजा करते समय किन बातों का रख़े ध्यान?
पूजा में जरूर रखें लाल फूल
पुराणों में बताया गया है कि, मां लक्ष्मी को लाल फूल अतिप्रिय होता है। इसलिए शुक्रवार को जब आप वैभव लक्ष्मी की पूजा करें तो लाल फूल जरूर अर्पित करें। यह लाल गुलाब या फिर लाल गुड़हल भी हो सकता है।
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वैसे मां लक्ष्मी की पूजा में सबसे अनिवार्य तो कमल का फूल माना जाता है। अगर यह न मिल सके तो आप गुलाब भी चढ़ा सकते हैं। पूजा के उपरान्त उसी गुलाब को अपने धन वाली जगह पर रख दें और रोजाना बदलते रहें।
श्री यंत्र की पूजा करे
शास्त्रों में मां वैभव लक्ष्मी की पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक श्री यंत्र की पूजा न की जाए। कई लोग केवल तस्वीर के सामने दीपक जला देते हैं, जबकि शास्त्र कहते हैं कि वैभव लक्ष्मी के साथ श्री यंत्र और मां लक्ष्मी के आठ स्वरूपों का ध्यान करना जरूरी है।
लहसुन, प्याज या मांसाहार निषेध
शुक्रवार के दिन घर में लहसुन, प्याज या मांसाहार का प्रयोग बिल्कुल न करें। इसके अलावा, इस दिन किसी की बुराई करना, घर में कलह करना भी अशुभ माना जाता है।
कैसे करें वैभव लक्ष्मी व्रत
- शुक्रवार के दिन सुबह स्नान कर साफ, धुले वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- लाल या सफेद रंग के कपड़े पहनना अच्छा होगा। पूरे दिन आप फलाहार करके यह व्रत रख सकते हैं।
- शुक्रवार को शाम को दोबारा स्नान करने के बाद पूर्व दिशा में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
- इस पर मां लक्ष्मी की प्रतिमा या मूर्ति और श्रीयंत्र स्थापित करें।
- वैभव लक्ष्मी की तस्वीर के सामने मुट्ठी भर चावल का ढेर लगाएं और उस पर जल से भरा हुआ तांबे का कलश स्थापित करें।
- कलश के ऊपर एक कटोरी में चांदी के सिक्के या कोई सोने-चांदी का आभूषण रखें।
- फिर रोली, मौली, सिंदूर, फूल,चावल की खीर आदि मां लक्ष्मी अर्पित करें।
- पूजा के बाद वैभव लक्ष्मी कथा का पाठ करें।
- वैभव लक्ष्मी मंत्र का यथाशक्ति जप करें और अंत में देवी लक्ष्मी की आरती कर दें।
- शाम को पूजा के बाद अन्न ग्रहण कर सकते हैं।
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वैभव लक्ष्मी मंत्र
या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।
या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥
या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।
सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥
वैभव लक्ष्मी व्रत के नियम
- व्रत का पारण मां लक्ष्मी की प्रसाद में चढ़ाई खीर से करें।
- इस दिन खट्टी चीजें नहीं खानी चाहिए।
- वैभव लक्ष्मी व्रत में श्रीयंत्र की पूजा अवश्य करें।
