अगस्त में इस दिन पड़ रही है शिवरात्रि, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजाविधि
मासिक शिवरात्रि का व्रत अविवाहित जातक शीघ्र विवाह के लिए रखते हैं। वहीं, विवाहित महिलाएं सुख और सौभाग्य में वृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है।
- Written By: सीमा कुमारी
मासिक शिवरात्रि (सौ.सोशल मीडिया)
Masik Shivratri 2025 : मासिक शिवरात्रि का व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को रखा जाता है। इस बार अगस्त महीने की मासिक शिवरात्रि का व्रत 21 अगस्त को है। यह व्रत भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त मासिक शिवरात्रि का व्रत भी रखा भी जाता है।
ज्योतिषियों के अनुसार, मासिक शिवरात्रि का व्रत अविवाहित जातक शीघ्र विवाह के लिए रखते हैं। वहीं, विवाहित महिलाएं सुख और सौभाग्य में वृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। आइए, भाद्रपद माह की मासिक शिवरात्रि की सही डेट और शुभ मुहूर्त जानते हैं-
ये है मासिक शिवरात्रि का शुभ मुहूर्त
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 21 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 44 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, 22 अगस्त को दिन में 11 बजकर 55 मिनट पर चतुर्दशी तिथि समाप्त होगी।
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भगवान शिव की पूजा मासिक शिवरात्रि को निशा काल में होती है। इसके लिए 21 अगस्त को भाद्रपद महीने की मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी। इस दिन निशा काल में पूजा का समय देर रात 12 बजकर 02 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक है।
भाद्रपद शिवरात्रि पर बन रहे हैं शुभ योग
ज्योतिषियों की मानें तो, भाद्रपद शिवरात्रि पर अभिजीत मुहूर्त का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही मासिक शिवरात्रि पर पुष्य नक्षत्र का योग है। इस दौरान भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से साधक को दोगुना फल मिलेगा।
पंचांग
- सूर्योदय – सुबह 05 बजकर 53 मिनट पर
- सूर्यास्त – शाम 06 बजकर 54 मिनट पर
- ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 26 मिनट से 05 बजकर 10 मिनट तक
- विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 34 मिनट से 03 बजकर 26 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 54 मिनट से 07 बजकर 16 मिनट तक
- निशिता मुहूर्त – रात्रि 12 बजकर 02 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक
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ऐसे करें मासिक शिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ की पूजा
सुबह उठकर स्नान करें और साफ धारण करें।
पूजा शुरू करने से पूर्व भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।
एक वेदी पर भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें।
शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन और पुष्प आदि चीजें चढ़ाएं।
चंदन और रोली से शिवलिंग पर तिलक लगाएं।
धूप और दीप जलाएं।
सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।
शिवरात्रि व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।
अंत में भगवान शिव की आरती करें।
