सावन में सिर्फ 5 मिनट करें ‘ॐ जय शिव ओंकारा’ आरती, महादेव की कृपा से सुख-समृद्धि और शांति का मिलेगा आशीर्वाद
Shiv Aarti Benefits 2026 : सावन में प्रतिदिन केवल 5 मिनट 'ॐ जय शिव ओंकारा' आरती करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। जानें आरती का महत्व, सही समय और इससे मिलने वाले आध्यात्मिक लाभ।
- Written By: सीमा कुमारी
शिव जी (सौ.AI)
Om Jai Shiv Omkara Lyrics: देशभर में आज, 30 जुलाई से सावन महीने का शुभारंभ हो चुका है। सुबह से ही भगवान शिव के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। भक्तजन जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित कर भोलेनाथ का रुद्राभिषेक कर रहे हैं। साथ ही शिव मंत्रों और चालीसा का पाठ करते हैं और व्रत भी रखते हैं।
कहते हैं सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे खास समय होता है। अगर आप भी भगवान शिव की असीम कृपा पाना चाहते हैं तो सावन में शिव की यह दिव्य आरती जरूर करें। कहते हैं इस आरती को करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यहां देखें ओम जय शिव ओंकारा आरती के लिरिक्स।
शिव जी की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
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ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै, भाले शशिधारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
कर के मध्य कमंडल चक्र त्रिशूलधारी ।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा ।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा ।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला ।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला ॥
जय शिव ओंकारा…॥
काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी ।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा…॥
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥
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आरती के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
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दीपक और घंटी
आरती के दौरान दाहिने हाथ में घी या कपूर का दीपक लेकर उसे चारों ओर घुमाएं और बाएं हाथ से घंटी बजाएं।
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नियम
आरती शांत और एकाचित मन से गाई जानी चाहिए।
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आरती की दिशा
दीपक को भगवान शिव के चरणों की तरफ चार बार, नाभि की तरफ दो बार और मुख की तरफ तीन बार पूरे शरीर पर साष्टांग भाव से आचमन करें।
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समापन
आरती के बाद कपूर से अंतिम प्रणाम करें, दोनों हाथों से आरती की लौ की आंच लेकर आँखों से लगाएं, और भगवान को भोग लगाएं।
