मां शीतला (सौ.AI)
Sheetala Saptami: शीतला अष्टमी व्रत हर साल चैत्र मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। जिसे बसौड़ा भी कहते है। इस साल यह व्रत 10 मार्च को मनाया जाएगा। धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, इस दिन माता शीतला की पूजा करने से न केवल बीमारियों से मुक्ति मिलती है, बल्कि घर में सुख-शांति का वास भी होता है।
शीतला सप्तमी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता। भक्त एक दिन पहले बना हुआ भोजन माता को चढ़ाते हैं और खुद भी वही खाते हैं, तो आइए उन दिव्य भोग के बारे में जानते हैं जिन्हें अर्पित करने से माता खुश होती हैं।
शास्त्रों के अनुसार, शीतला सप्तमी के दिन शीतला माता को दही और राबड़ी का भोग लगाना शुभ बताया गया हैं। कहा जाता है कि, यह माता रानी को बहुत पसंद है। ऐसा कहा जाता है कि इसे भोग के रूप में चढ़ाने से रोग-दोष से मुक्ति मिलती है। अगर आप रोग-दोष से मुक्ति चाहते है तो इस दिन दही और राबड़ी का भोग लगाना ना भूलें।
कहते है इस दिन भीगी हुई मूंग की दाल और बाजरा भी माता शीतला को अर्पित की जाती है। इसे चढ़ाने से देवी की पूर्ण कृपा मिलती है।
शीतला सप्तमी के दिन शीतला माता को प्रसन्न करने के लिए मीठे चावल का भोग लगा सकते है। इस शुभ दिन पर माता शीतला को गुड़ या शक्कर से बने मीठे चावल का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है।
इसे सप्तमी से एक रात पहले तैयार कर लिया जाता है। मान्यता है कि मीठे चावल माता को शीतलता प्रदान करते हैं और भक्तों के जीवन में मिठास लाते हैं।
यह भी पढ़ें- मार्च में किस दिन है चैत्र शिवरात्रि? वैवाहिक सुख और मनोकामना पूर्ति के लिए इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा
इस दिन शीतला माता को प्रसन्न करने के लिए आटे और गुड़ के बने गुलगुले का भोग भी लगा सकते हैं। गुलगुले का भोग इस दिन के मुख्य प्रसाद का हिस्सा होते हैं। पूजा के समय इन्हें माता के सामने रखकर संतान की लंबी आयु और अच्छी सेहत की कामना की जाती है।