कब है 2026 की पहली एकादशी? जानिए षटतिला एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Shattila Ekadashi Vrat: ज्योतिषयों के अनुसार, इस बार मकर संक्रांति और एकादशी दोनों एक दिन है। 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी व्रत का दुर्लभ संयोग 148 साल बाद बन रहा है।
- Written By: सीमा कुमारी
षटतिला एकादशी कब मनाई जाएगी (सौ.सोशल मीडिया)
Shattila Ekadashi 2026: हर साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को ‘षटतिला एकादशी’ मनाई जाती है। इस साल यह एकादशी 14 जनवरी को है। इस दिन मकर संक्रातिं का पर्व भी मनाई जा रही है। आपको बता दें कि, इस बार मकर संक्रांति और एकादशी दोनों एक दिन पड़ने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ गया है। 14 जनवरी 2026 मकर संक्रान्ति, षटतिला एकादशी, पोंगल, सूर्य के उत्तरायण होने पर ही मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है।
इस शुभ तिथि पर लोग भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। साथ ही अन्न और धन का दान गरीब लोगों में किया जाता है। मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से जीवन खुशियों से भर जाता है। साथ ही श्रीहरि और देवी लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहती है।
षटतिला एकादशी कब मनाई जाएगी
आपको बता दें, इस साल षटतिला एकादशी 14 जनवरी को है। इस दिन मकर संक्राति का पर्व भी है। पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 13 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 17 मिनट से शुरू होगी। वहीं, तिथि का समापन 14 जनवरी को शाम 05 बजकर 52 मिनट पर होगा। ऐसे में 14 जनवरी को षटतिला एकादशी व्रत किया जाएगा और 15 जनवरी को व्रत का पारण किया जाएगा।
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षटतिला एकादशी व्रत पारण
षटतिला एकादशी व्रत का पारण 15 जनवरी को सुबह 07 बजकर 15 मिनट से 09 बजकर 21 मिनट तक है। इस दौरान किसी भी समय व्रत का पारण कर सकते हैं।
इस दिन के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 27 मिनट से 06 बजकर 21 मिनट तक
विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 15 मिनट से 02 बजकर 57 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त – शाम 05 बजकर 43 मिनट से 06 बजकर 10 मिनट तक
निशिता मुहूर्त – 15 जनवरी को रात 12 बजकर 03 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक
148 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग
ज्योतिषयों के अनुसार, इस बार मकर संक्रांति और एकादशी दोनों एक दिन है। 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी व्रत का दुर्लभ संयोग 148 साल बाद बन रहा है। 14 जनवरी की रात सूर्य मकर राशि में गोचर करेंगे।
एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है, जबकि संक्रांति सूर्य देव की उपासना का पर्व है। इस विशेष संयोग में किया गया स्नान, दान और जप सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी माना जाता है।
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मकर संक्रांति पर दान करने का बहुत महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर ग्रह दोषों के अलावा अपने पितरों के लिए भी दान करना चाहिए। इससे उनकी कृपा आप पर बनी रहती है।
