भगवान शिव (सौ.सोशल मीडिया)
Shani Pradosh Vrat Katha:आज 14 फरवरी 2026 को फाल्गुन महीने का पहला प्रदोष व्रत यानी शनि प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। प्रदोष व्रत का हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व है। भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए यह तिथि अत्यंत शुभ माना जाता है।
धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, इस दिन व्रत रखने, कथा सुनने और पूजा करने से जीवन की सारी परेशानियों में राहत मिलती है और भगवान शिव तथा शनिदेव की विशेष कृपा भी बरसती है।
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक नगर में एक सेठ और उसकी पत्नी रहते थे। उनके पास धन-दौलत और सुख-सुविधाएँ थीं, लेकिन संतान न होने के कारण वे मन से दुखी रहते थे। बहुत सोच-विचार के बाद सेठ ने अपना व्यापार नौकरों को सौंप दिया और पत्नी के साथ तीर्थयात्रा पर निकल पड़े।
रास्ते में उन्हें एक साधु मिले, जो ध्यानमग्न बैठे थे। सेठ और सेठानी साधु के पास बैठ गए और उनसे आशीर्वाद मांगने का विचार किया। साधु ने अपनी आंखें खोलीं और कहा कि वे उनका दुख जानते हैं।
उन्होंने सेठ और सेठानी से कहा कि वे शनि प्रदोष व्रत करें, इससे उन्हें संतान सुख और सुख-शांति प्राप्त होगी। साधु ने व्रत की विधि और भगवान शिव की स्तुति भी बताई।
तीर्थ यात्रा से लौटकर, सेठ और सेठानी ने नियमपूर्वक शनि प्रदोष व्रत किया। कुछ समय बाद ही उनके घर एक सुंदर पुत्र का जन्म हुआ और उनका जीवन खुशियों से भर गया। यह कथा यही संदेश देती है कि भक्ति, धैर्य और सच्चे मन से किए गए व्रत का फल निश्चित रूप से मिलता है।
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धार्मिक परंपरा में विशेष समय- प्रदोष काल को भगवान शिव की पूजा के लिए बहुत शुभ माना जाता है। प्रदोष काल वह समय होता है जब दिन समाप्त होकर रात का आरंभ होता है, यानी शाम का समय। इस समय भगवान शिव की आराधना करने से मन में सकारात्मक ऊर्जा आती है, मनोबल मजबूत होता है और जीवन की बाधाएं भी कम होती हैं।
विशेष रूप से शनिवार को पड़ने वाले प्रदोष पर, शिव और शनिदेव दोनों की पूजा-आराधना का फल अधिक शुभ माना जाता है।
प्रदोष काल में शिवलिंग पर जलाभिषेक, बेलपत्र, धूप-दीप और फल-फूल अर्पित करना, साथ ही “ॐ नमः शिवाय” और शनिदेव के बीज मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी समझा जाता है।
कहा जाता है कि इससे नकारात्मक ग्रह प्रभाव कम होते हैं और जीवन में सुख-शांति तथा समृद्धि आती है।
ज्योतिष पंचांग के अनुसार आज प्रदोष काल का शुभ समय शाम में 06:10 बजे से 08:44 बजे तक है। इसी अवधि में भगवान शिव और शनिदेव की विधि-विधान से पूजा करना शुभ माना जाता है। इसके पहले का समय गोधूलि अर्थात सूर्यास्त के बाद का आरंभिक समय भी लाभदायक रहता है।