शनि प्रदोष व्रत 2026: पूजा के दौरान इन भूलों से रहें दूर, तभी मिलेगा भगवान शिव और शनिदेव का आशीर्वाद
Shani Pradosh Vrat Puja Rules:शनि प्रदोष व्रत 2026 के दिन भगवान शिव और शनिदेव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। जानिए किन बातों का ध्यान रखने से व्रत और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सकता है।
- Written By: सीमा कुमारी
शनि प्रदोष व्रत (सौ.सोशल मीडिया)
Shani Pradosh Vrat 2026: 27 जून को ज्येष्ठ मास का अंतिम प्रदोष व्रत रखा जाएगा। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और यह हर महीने कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर किया जाता है। जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, तो उसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत एवं पूजा करने पर भगवान शिव के साथ-साथ शनिदेव की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है।
विशेष रूप से जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, उनके लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि पूजा या व्रत के दौरान कुछ बातों की अनदेखी कर दी जाए, तो व्रत का शुभ प्रभाव कम हो सकता है। इसलिए इस दिन कुछ जरूरी नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
शनि प्रदोष व्रत में इन बातों का रखें विशेष ध्यान:
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शिवलिंग पर भूलकर भी न चढ़ाएं ये सामग्री
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव की पूजा में शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर, कुमकुम और केतकी का फूल अर्पित नहीं करना चाहिए। शास्त्रों में इन वस्तुओं को शिव पूजा के लिए वर्जित माना गया है। पूजा में केवल वही सामग्री अर्पित करें, जो भगवान शिव को प्रिय मानी गई है।
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सात्विक भोजन का ही करें सेवन
शनि प्रदोष व्रत के दिन घर में यथासंभव सात्विक वातावरण बनाए रखें। इस दिन प्याज, लहसुन, मांसाहार और शराब जैसी तामसिक चीजों से दूरी बनाकर रखें। यदि परिवार का कोई सदस्य व्रत रख रहा हो, तो अन्य सदस्य भी संभव हो तो सात्विक भोजन करें।
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गुस्से और कटु वचन से बचें
भगवान शिव को करुणा और शांति का प्रतीक माना जाता है, जबकि शनिदेव कर्मों के अनुसार फल देने वाले देवता हैं। ऐसे में इस दिन किसी का अपमान न करें, क्रोध से बचें और किसी भी प्रकार के झगड़े, बहस या कटु शब्दों का प्रयोग करने से परहेज करें। मधुर व्यवहार और संयम का पालन करना शुभ माना जाता है।
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व्रत के नियमों का ईमानदारी से पालन करें
यदि आपने शनि प्रदोष व्रत का संकल्प लिया है, तो पूरे दिन व्रत के नियमों का पालन करें। परंपरा के अनुसार इस दिन अनाज का सेवन नहीं किया जाता। फलाहार या सेंधा नमक से बने व्रत के खाद्य पदार्थों का सेवन करना उचित माना जाता है।
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बेलपत्र चढ़ाते समय रखें यह सावधानी
भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व है। पूजा के लिए हमेशा ताजा, साफ और अखंडित बेलपत्र का ही उपयोग करें। फटा हुआ, सूखा या खंडित बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि श्रद्धा और शुद्ध भाव से अर्पित किया गया बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है।
