Ashadha Maas: 30 जून से शुरू होगा आषाढ़ मास, भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना हो सकता है भारी नुकसान
Ashadha Maas Rules: 30 जून से आषाढ़ मास का शुभारंभ होने जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पवित्र माह में कुछ कार्यों से बचना चाहिए। जानिए आषाढ़ मास में किन गलतियों से बचना चाहिए।
- Written By: सीमा कुमारी
आषाढ़ मास (सौ.AI)
Ashadha Maas Astrology Tips: 30 जून 2026, मंगलवार से हिंदू पंचांग का चौथा महीना आषाढ़ मास शुरू हो रहा है। इसी के साथ वर्षा ऋतु का भी शुभ आगमन माना जाता है। सनातन परंपरा में इस महीने को भक्ति, तपस्या, जप, दान और आत्मिक साधना का विशेष समय माना गया है।
मान्यता है कि इस दौरान किए गए धार्मिक कार्य कई गुना अधिक फलदायी होते हैं। वहीं मौसम में बदलाव के कारण शास्त्रों में खान-पान और दिनचर्या को लेकर भी कई महत्वपूर्ण नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं कि आषाढ़ मास में क्या करना शुभ माना गया है और किन कार्यों से बचना चाहिए।
क्यों इतना खास माना जाता है आषाढ़ का महीना?
धार्मिक दृष्टि से आषाढ़ मास भगवान विष्णु की आराधना का अत्यंत महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इसी महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी आती है, जिसके साथ ही चातुर्मास का शुभारंभ हो जाता है।
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मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार महीने बाद देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है, जबकि पूजा-पाठ, जप, तप और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व बढ़ जाता है।
आषाढ़ मास में जरूर करें ये शुभ कार्य
- प्रतिदिन भगवान विष्णु का पूजन करें और उनके मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- नियमित रूप से विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने का संकल्प लें।
- सुबह स्नान के बाद तांबे के पात्र से सूर्यदेव को जल अर्पित करें।
- मौसम के अनुसार तरबूज, खरबूजा, खीरा जैसे रसीले फलों का सेवन करें।
- एकादशी, अमावस्या या पूर्णिमा के अवसर पर किसी पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है।
- ध्यान, जप, तप और धार्मिक साधना में अधिक समय दें।
- सात्विक भोजन करें और अनुशासित दिनचर्या अपनाएं।
- जरूरतमंद लोगों को छाता, चप्पल, तरबूज, खरबूजा, खीरा तथा अपनी क्षमता अनुसार दक्षिणा का दान करें।
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आषाढ़ में इन कामों से बनाएं दूरी
- इस महीने विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक संस्कार करने से बचें।
- जल की बर्बादी न करें और पानी का हमेशा सम्मान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसा न करने से वरुण देव अप्रसन्न हो सकते हैं।
- बासी या लंबे समय से रखा हुआ भोजन खाने से बचें।
- तली-भुनी, अत्यधिक मसालेदार और भारी भोजन का सेवन कम करें।
- मांस, मदिरा और अन्य तामसिक पदार्थों से दूरी बनाए रखें।
- पत्तागोभी, पालक जैसी पत्तेदार सब्जियां, मसूर की दाल और बैंगन का सेवन करने से परहेज करने की परंपरा बताई गई है।
- बारिश के मौसम में स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही न करें, क्योंकि संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
आषाढ़ का संदेश
आषाढ़ मास केवल एक धार्मिक महीना नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा को संतुलित रखने का भी अवसर माना जाता है। यदि इस दौरान संयम, सात्विकता और श्रद्धा के साथ जीवनचर्या अपनाई जाए, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
