(सौजन्य सोशल मीडिया)
सावन मास को भोले बाबा का प्रिय महीना कहा जाता है। इस दौरान सच्चे मन से पूजा करने वालों पर भगवान भोले बाबा की असीम कृपा बरसती है। वहीं, पूजा में जलाभिषेक के साथ बेलपत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, भगवान शिव को चढ़ाए गए बेलपत्र का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और बेलपत्र को भगवान शिव का प्रतीक भी माना जाता है।
बेलपत्र द्वारा की गई पूजा शिवजी की कृपा प्राप्ति का मार्ग खोलती है। लेकिन, आपको बता दें, चढ़ाए गए बेलपत्र के निवारण को लेकर लोगों में तमाम प्रकार की भ्रांतियां हैं। आइये जानते हैं कि चढ़ाए गए बेलपत्र का निवारण इसे कूड़ेदान में फेंक कर, कुएं में फेंक कर या तालाब में प्रवाहित करके, किस तरह करना चाहिए जिससे हम दोष के भागी न बनें।
इस विषय में ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि, भगवान शिव को चढ़ाए गए बेलपत्र को कूड़ेदान में फेंकना अशुभ माना जाता हैं। यह भगवान शिव का अनादर भी माना जाता हैं। शास्त्रों में यह बताया गया है कि चढ़ाई गई पूजन सामग्री को सम्मानजनक तरीके से व्यवस्थित करना चाहिए या जल समाधि देनी चाहिए। बेलपत्र को कूड़ेदान में फेंकना धार्मिक अपवित्रता का संकेत है और इससे भगवान शिव की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। इससे आपके जीवन में कष्ट बढ़ेंगे और आपको धन हानि भी हो सकती है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, भगवान शिव को चढ़ाए गए बेलपत्र को नदी, तालाब या किसी पवित्र स्थान पर विसर्जित करना चाहिए। यदि यह संभव न हो तो उसे किसी पेड़ के नीचे या बगीचे में उचित तरीके से रखें। इस प्रकार से बेलपत्र को व्यवस्थित करना शुभ और धर्म अनुसार होता है।
यदि आप शिव मंदिर गए हैं और आपके पास शिव पूजा में चढ़ाने के लिये बेल-पत्र नहीं है तो परेशान न हों। शिवलिंग पर पहले से अर्पित बेलपत्र को उठाकर जल से धो लें। फिर उसे शिवजी को अर्पित कर दें। एक बार अर्पित किए गए बेलपत्र को दोबारा भी उपयोग में ला सकते हैं। वह जूठा नहीं माना जाता है। यह ताजे बेलपत्र अर्पित करने के समान ही माना जाता है और इससे शिवजी की कृपा प्राप्त होती है।
शास्त्रों के अनुसार, बेलपत्र को कुछ विशेष तिथियों में तोड़ना वर्जित माना जाता है। जैसे कि चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या को। संक्रांति के समय और खासकर, सोमवार के दिन बेलपत्र को भूलकर भी नहीं तोड़ना चाहिए। ऐसे में पूजा से एक दिन पहले ही बेलपत्र तोड़कर रखा जाता है। इन दिनों में बेलपत्र तोड़ने से दोष लगता है इसलिये गलती से भी इन दिनों पर बेलपत्र न तोड़े।
लेखिका- सीमा कुमारी