आज महानवमी के दिन पढ़ें मां सिद्धिदात्री की ये कथा, माता आदिशक्ति का मिलेगा आशीर्वाद
शारदीय नवरात्रि का आज अंतिम दिवस यानि महानवमी का त्योहार है इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैं और कन्याओं का पूजन कर भोजन कराया जाता है। कहते हैं महानवमी पर पूजन करने से भक्तों को सिद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- Written By: दीपिका पाल
मां सिद्धिदात्री की पूजा (सौ.सोशल मीडिया)
Shardiya Navratri 2024: शारदीय नवरात्रि का आज अंतिम दिवस यानि महानवमी का त्योहार है इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती हैं और कन्याओं का पूजन कर भोजन कराया जाता है। कहते हैं महानवमी पर पूजन करने से भक्तों को सिद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन माता भगवती के नाम से जाना जाता है। आज का दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा के लिए विशेष होता हैं तो वहीं पर पूजन को फलदायी बनाने के लिए कथा पढ़ी जाती है। बता दें कि, मां को आदि शक्ति भगवती के नाम से भी जाना जाता है नवमी पर पूजन के साथ विधि-विधान का होना जरूरी है।
जानिए कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
यहां पर आज अष्टमी औऱ नवमी की तिथि मनाई जा रही है इस दिन कन्याओं को देवी के रूप में पूजकर भोजन कराया जाता है। इसका शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 44 मिनट से लेकर 10. बजकर 37 मिनट तक रहेगा. वहीं नवमी तिथि का कन्या पूजन के शुभ मुहूर्त की शुरुआत 2 बजे से लेकर 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा एक मुहूर्त सुबह 11 बजकर 45 मिनट से लेकर 12 बजकर 30 मिनट तक भी रहेगा, इस मुहूर्त में भी कन्या पूजन किया जा सकता है।
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जानिए मां सिद्धिदात्री की कथा
आज नवमी की तिथि पर मां दुर्गा के नौवे स्वरूप यानि मां सिद्धिदात्री का पूजन करना जरूरी होता हैं इसमें मार्कण्डेय पुराण के अनुसार मां सिद्धिदात्री को अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व आठ प्रकार की सिद्धियां प्राप्त हैं पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या कर आठों सिद्धियों को प्राप्त किया था. मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी हो गया था और वह अर्धनारीश्वर कहलाएं। कहा जाता हैं कि, मां दुर्गा के नौ रूपों में यह रूप बहुत ही शक्तिशाली रूप है. मान्यता है कि, मां दुर्गा का यह रूप सभी देवी-देवताओं के तेज से प्रकट हुआ है. कथा में वर्णन है कि जब दैत्य महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवतागण भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे. तब वहां मौजूद सभी देवतागण से एक तेज उत्पन्न हुआ और उसी तेज से एक दिव्य शक्ति का निर्माण हुआ, जिसे मां सिद्धिदात्री कहा जाता है।
