Sakat Chauth 2026: आज सकट चौथ पर करें इस व्रत कथा का पाठ, भक्तों को मिलता है गणेशजी का आशीर्वाद
Sakat Chauth Significance: यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है, जिन्हें संकटहर्ता कहा गया है। इस दिन भगवान श्रीगणेश की पूजा और कथा का पाठ जो भी भक्त करते है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती है।
- Written By: दीपिका पाल
सकट चौथ व्रत कथा 2026(सौ.सोशल मीडिया)
Sakat Chauth Significance: हिंदू धर्म में हर व्रत और त्योहार का महत्व होता है इसमें ही आज माताओं द्वारा सकट चौथ का व्रत रखा जा रहा है। यहां पर यह व्रत संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन में आने वाले संकटों से रक्षा के लिए रखा जाता है। खासतौर पर यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है, जिन्हें संकटहर्ता कहा गया है।
कहते है इस दिन भगवान श्रीगणेश की पूजा और कथा का पाठ जो भी भक्त करते है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती है।
सकट चौथ व्रत कथा का पाठ
यहां पर सकट चौथ व्रत कथा का पाठ करने से भगवान सभी संकट को हर ( मिटा) लेते है। धार्मिक मान्यता है कि सकट चौथ का अर्थ ही है “संकटों को काटने वाली चतुर्थी”। कथा का पाठ करने से आस्था मजबूत होती है और भगवान गणेश की कृपा से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। यह व्रत धार्मिक और भावनात्मक रूप से प्रबल बनाता है।सकट चौथ के दिन गणेशजी का पूजन के बाद सकट चौथ व्रत कथा अवश्य सुननी या पढ़नी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस कथा को श्रद्धा से सुनने वाली माताओं की संतान पर आने वाले सभी संकट टल जाते है।
सम्बंधित ख़बरें
Shani Mahadasha: क्या होती है शनि की महादशा? जानिए 19 साल तक चलने वाली इस दशा के प्रभाव और उपाय
सावन में करें भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, हर धाम का अपना है विशेष महत्व
Sawan 2026 Vastu Tips: सावन शुरू होने से पहले घर से बाहर कर दें ये 7 चीजें, शिव की कृपा से होगा भाग्य उदय
Yogini Ekadashi 2026: योगिनी एकादशी पर इन पांच चीजों का दान माना जाता है सबसे शुभ
सकट चौथ व्रत कथा का संक्षिप्त सार
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय एक कुम्हार के बर्तन भट्टी में पक नहीं रहे थे। पंडितों की सलाह पर हर बार एक बच्चे की बलि देने की प्रथा शुरू हुई। एक दिन एक गरीब बुढ़िया के इकलौते बेटे की बारी आई। संयोग से वह दिन सकट चौथ का था। बुजुर्ग महिला ने अपने बेटे को गणेश जी का ध्यान करने को कहा और स्वयं पूरी रात पूजा करती रही। अगले दिन चमत्कार हुआ—बुजुर्ग महिला का बेटा ही नहीं, बल्कि पहले बलि दिए गए सभी बच्चे जीवित मिल गए। तभी से यह व्रत संतान की रक्षा के लिए किया जाने लगा।
ये भी पढ़ें-संतान की लंबी आयु चाहते हों, तो सकट चौथ के दिन क्या न करें और क्या करें ? जानिए
सकट चौथ के दिन अपनाएं नियम
सकट चौथ व्रत के दिन आपको कुछ नियमों का पालन करना चाहिए जो जरूरी होता है।
- व्रत के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
- गणेश जी को तिल, गुड़, लड्डू और दूर्वा अर्पित करें
- चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोलें
- कथा का पाठ स्वयं करें या परिवार के साथ सुनें
- संतान के नाम से दान करें, जैसे तिल या गर्म कपड़े
- पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य व्यवधानों से दूरी रखें
