Hindi news, हिंदी न्यूज़, Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest Hindi News
X
  • देश
  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्य प्रदेश
  • विदेश
  • चुनाव
  • खेल
  • मनोरंजन
  • नवभारत विशेष
  • वायरल
  • धर्म
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • करियर
  • टेक्नॉलजी
  • यूटिलिटी
  • हेल्थ
  • ऑटोमोबाइल
  • वीडियो
  • बुध, 5 अगस्त 2026
  • वेब स्टोरीज
  • फोटो
  • ई-पेपर
  • विडियो
  • फटाफट खबरें

Rani Laxmi Bai: सिर्फ 29 साल की उम्र में इतिहास रच गई थीं रानी लक्ष्मीबाई, जानें उनकी बहादुरी के अनसुने किस्से

Rani Laxmi Bai Death Anniversary: झांसी की रानी लक्ष्मी बाई वीरता की ऐसी मिसाल थीं, जिनकी वीरगाथा हर भारतीय महिला के लिए प्रेरणादायी है। उनकी वीरता के मुरीद उनके खिलाफ लड़ने वाले अंग्रेज तक हो गए थे।

  • Written By: रीता राय सागर
Updated On: Jun 18, 2026 | 01:09 PM

रानी लक्ष्मी बाई (फोटो.सोशल मीडिया)

Follow Us
Follow Us:

Jhansi Ki Rani Lakshmi Bai Biography: पेशवा शासक बाजीराव द्वितीय के घर एक असामान्य ब्राह्मण परिवार में जन्मी लक्ष्मी बाई का जन्म 19 नवंबर, 1835 में काशी में हुआ था और उनकी म्रत्यु 17 जून, 1858 में कोठा-की-सेराई, ग्वालियर के पास हुई थी।

आज हम जिस रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धा पुष्प अर्पित कर रहे हैं, वो उस वीरता शौर्य साहस और पराक्रम का नाम है, जिसने अपने छोटे से जीवन काल में वो मुकाम हासिल किया, जिसकी मिसाल आज भी दुर्लभ है।

अंग्रेजों को युद्ध के लिए ललकारा

25 वर्ष की एक महिला जिसने अपने पति और पुत्र को खोने के बाद भी अंग्रेजों को युद्ध के लिए ललकारने का जज्बा रखती हो वो नि:संदेह हर महिला के लिए प्रेरणा स्रोत रहेगी। वो ऐसा दौर था, जब 1857 की क्रांति से घायल अंग्रेजों ने भारतीयों पर और अधिक अत्याचार करने शुरू कर दिए थे और बड़े से बड़े राजा भी अंग्रेजों के खिलाफ जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे।

सम्बंधित ख़बरें

Sawan 2026: सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से पहले जान लें ये 4 नियम, एक छोटी भूल भी पड़ सकती है भारी

Breastfeeding Guide: ब्रेस्टफीडिंग के दौरान सही नर्सिंग ब्रा कैसे चुनें? जानें आराम और सपोर्ट के जरूरी टिप्स

6 August 2026 Panchang: अष्टमी तिथि पर बन रहे हैं कई शुभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूजा का सही समय

नागपुर MRO में गतिविधियों पर ब्रेक: हड़ताल के बाद सीमित हुआ कामकाज, एयर इंडिया ने नए विमानों का मेंटेनेंस रोका

ऐसे समय में रानी लक्ष्मीबाई की दहाड़ ने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी। क्योंकि रानी लक्ष्मीबाई की इस दहाड़ की गूंज झांसी तक सीमित नहीं रही, वो पूरे देश में सुनाई दी और उस आवाज से बच्चे-बच्चे में हिम्मत भर दिया।

जब रानी लक्ष्मीबाई ने झांसी सौंपने से किया इंकार

पेशवा के दरबार में लड़कों के साथ बढ़ते हुए, उन्होंने मार्शल आर्ट, तलवारबाजी व घुड़सवारी का प्रशिक्षण लिया। 27 फरवरी 1854 को लॉर्ड डलहौजी ने गोद की नीति के अंतर्गत दत्तकपुत्र दामोदर राव की गोद अस्वीकृत कर दी और झांसी को अंग्रेजी राज्य में मिलाने की घोषणा कर दी।

22 साल की रानी ने झांसी को अंग्रेजों को सौंपने से मना कर दिया। साल 1857 में विद्रोह की शुरुआत के कुछ समय बाद झांसी में लक्ष्मी बाई के शासन की घोषणा की गई और उन्होंने अपने नाबालिग उत्तराधिकारी की ओर से झांसी पर शासन किया। अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह में शामिल होने के बाद, उन्होंने तेजी से अपने सैनिकों को संगठित किया और बुंदेलखंड क्षेत्र में विद्रोहियों का प्रभार संभाला। पड़ोसी क्षेत्रों ने उनका समर्थन किया और उनकी ओर से विद्रोहियों से लड़े।

आत्मसमर्पण से किया इंकार

जनरल ह्यूज रोज (Gen. Hugh Rose) के तहत, ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना ने जनवरी 1858 तक बुंदेलखंड में अपनी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी थी। महू से आगे बढ़ते हुए, रोज ने फरवरी में सागौर पर कब्जा कर लिया और फिर मार्च में झांसी की ओर बढ़ गए। कंपनी की सेनाओं ने झांसी के किले को घेर लिया और युद्ध छिड़ गया। आक्रमणकारी ताकतों को कड़ा प्रतिरोध देते हुए, लक्ष्मी बाई ने अपने सैनिकों के मरने के बाद भी आत्मसमर्पण नहीं किया। लक्ष्मी बाई महल के रक्षक की मदद से किले से भागने में कामयाब रही और पूर्व की ओर चली गई, जहां अन्य विद्रोहियों को भी अपनी ओर किया।

ये भी पढ़ें- Maharana Pratap Jayanti 2026: आज है महाराणा प्रताप की जयंती, जानें हल्दीघाटी के महान योद्धा की शौर्यगाथा

रानी लक्ष्मीबाई के जीवन से मिलने वाली प्रेरणा

  • हर परिस्थिति में आत्म सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा। जब आपके पास दो विकल्प हो आत्म समर्पण या लड़ाई, तो लड़कर अपने स्वाभिमान को बचाना।
  • रानी लक्ष्मी बाई के पास अंग्रेजों के मुकाबले संसाधनों और सैनिकों की कमी थी, लेकिन इससे उनका हौसला डगमगाया नहीं बल्कि और मजबूत कर दिया।
  • हर हाल में अपनी झांसी को बचाना ही उनका लक्ष्य था, जिसके लिए वो अपनी जान देकर अमर हो गईं।
  • मात्र 25 वर्ष की आयु में अपने राज्य की रक्षा के लिए ब्रिटिश साम्राज्य से विद्रोह हमें सिखाता है कि अपने अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाया जा सकता है। उन्होंने अंग्रेजों के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाकर न्याय के लिए लड़कर गीता का ज्ञान चरितार्थ कर दिखाया।
  • जो सबसे महत्वपूर्ण और व्यवहारिक शिक्षा रानी लक्ष्मीबाई के जीवन से हमें मिलती है वो ये कि शस्त्र और शास्त्र विद्या, तार्किक बुद्धि, युद्ध कौशल और ज्ञान किसी औपचारिक शिक्षा की मोहताज नहीं है। उन्होंने कोई औपचारिक शिक्षा ग्रहण नहीं की थी, लेकिन उनके युद्ध कौशल ने ब्रिटिश साम्राज्य को भी अचंभे में डाल दिया था।

Rani laxmi bai death anniversary inspiration from rani laxmibai life story

Get Latest   Hindi News ,  Maharashtra News ,  Entertainment News ,  Election News ,  Business News ,  Tech ,  Auto ,  Career and  Religion News  only on Navbharatlive.com

Published On: Jun 18, 2026 | 07:17 AM

Topics:  

  • Hindi News
  • Jhansi News
  • Rani Lakshmibai
  • Religion News

Popular Section

  • देश
  • विदेश
  • खेल
  • लाइफ़स्टाइल
  • बिज़नेस
  • वेब स्टोरीज़

States

  • महाराष्ट्र
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्यप्रदेश
  • दिल्ली NCR
  • बिहार

Maharashtra Cities

  • मुंबई
  • पुणे
  • नागपुर
  • ठाणे
  • नासिक
  • अकोला
  • वर्धा
  • चंद्रपुर

More

  • वायरल
  • करियर
  • ऑटो
  • टेक
  • धर्म
  • वीडियो

Follow Us On

Contact Us About Us Disclaimer Privacy Policy Terms & Conditions Author
Marathi News Epaper Hindi Epaper Marathi RSS Sitemap

© Copyright Navbharatlive 2026 All rights reserved.