आज इस शुभ मुहूर्त में करें गोवर्धन पूजा, भगवान श्रीकृष्ण की आप पर बने रहेगी कृपा
Importance of Goverdhan Puja: आज 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा के रूप में मनाया जा रहा है। कहते है कि, इस दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत एक उंगली पर उठाकरर ब्रजवासियों की रक्षा की थी।
- Written By: दीपिका पाल
गोवर्धन पूजा में शामिल करना न भूलें ये चीजें (सौ. सोशल मीडिया)
Importance of Goverdhan Puja: दीपोत्सव में चौथे दिन यानि आज 22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा के रूप में मनाया जा रहा है। कहते है कि, इस दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत एक उंगली पर उठाकरर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। इसलिए गोवर्धन पूजा की परंपरा को माना जाता है। इस पर्व को मुख्य तौर पर मथुरा, वृंदावन, नंदगांव, गोकुल, बरसाना में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। घरों में लोग विधि पूर्वक गोवर्धन पूजा करते है। इस पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा सामग्री के बारे में बताया गया है जो इस प्रकार है।
गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त
गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त – सुबह 6 बजकर 26 मिनट से रात 8 बजकर 42 मिनट तक
गोवर्धन पूजा सायाह्नकाल मुहूर्त – दोपहर 3 बजकर 29 मिनट से शाम 5 बजकर 44 मिनट तक
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क्या चाहिए पूजा साम्रगी
- गाय का गोबर (गिरिराज महाराज बनाने के लिए)
- कलश, रोली, घी,
- फूल, फूल माला, नारियल
- चावल, दीपक, गंगाजल
- प्रसाद में मिठाई, फल और खीर
- दूध, दही, गंगाजल, शहद, बताशे
इस विधि के साथ करें गोवर्धन पूजा
- गोवर्धन पूजा के दिन उस स्थान की अच्छे से साफ-सफाई कर गंगाजल का छिड़काव करें और और वहां साफ कपड़ा बिछाएं, जहां गिरिराज महाराज बनाए जाने हैं।
- अब गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाए और शुभ मुहूर्त में पूजा आरंभ करें।
- सबसे पहले दीपक जलाएं और भगवान कृष्ण व गोवर्धन पर्वत की आराधना करें।
- पूजा में धूप, दीप, नैवेद्य, जल, फल, फूल आदि अर्पित करें।
- गोवर्धन जी की नाभि के स्थान पर एक मिट्टी का दीपक या कोई अन्य पात्र रखें और उसमें दूध, दही, गंगाजल, शहद, बताशे डालें।
- पूजा के बाद में इसे प्रसाद के रूप में बांटें। अंत में गोवर्धन जी की सात बार परिक्रमा करें और आरती करें।
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इस दिन पशुओं की पूजा का भी है महत्व
गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने के साथ ही कृषि के काम में आने वाले पशुओं जैसे गाय, बैल आदि की भी पूजा की जाती है। साथ ही इस दिन पर अन्नकूट के लिए विशेष रूप से कढ़ी-चावल भी बनाए जाते हैं। इसके अलावा भोग में पंचामृत और माखन-मिश्री को भी शामिल किया जाता है। इस पूजा को विधि विधान के साथ करने से बहुत लाभ मिलते है।
