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विवाह पंचमी पर राम कथा का वो पल, जब सीता वियोग में प्रभु राम ने पृथ्वी के विनाश का लिया संकल्प

Rama and Sita's wedding: मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इसी शुभ दिन अयोध्या के राजकुमार प्रभु श्रीराम और माता सीता का पावन विवाह हुआ था।

  • Written By: सिमरन सिंह
Updated On: Jan 22, 2026 | 06:10 PM

Sita and Ram (Source. Pinterest)

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Sita’s return to Mother Earth: मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इसी शुभ दिन अयोध्या के राजकुमार प्रभु श्रीराम और जनकपुर की राजकुमारी माता सीता का पावन विवाह हुआ था। यह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि धर्म की गरिमा, त्याग की मर्यादा और समर्पण की परंपरा का मिलन था। इस वर्ष विवाह पंचमी 25 नवंबर, मंगलवार को पड़ रही है। इसी अवसर पर अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ध्वजारोहण कार्यक्रम की भी चर्चा है।

जब मर्यादा पुरुषोत्तम ने किया सबसे बड़ा त्याग

उत्तर रामायण की कथा के अनुसार, वनवास के बाद जब श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण अयोध्या लौटे, तो कुछ समय पश्चात माता सीता के चरित्र पर प्रश्न उठने लगे। लोक मर्यादा की रक्षा के लिए प्रभु श्रीराम ने कठोर निर्णय लेते हुए माता जानकी का त्याग कर दिया। माता सीता महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रहीं और वहीं लव-कुश का जन्म हुआ। बाद में लव-कुश ने गायन के माध्यम से अयोध्या के राजमहल में स्वयं को श्रीराम का पुत्र बताया, जिसे सुनकर अयोध्यावासी आनंदित हो उठे।

धरती मां में समाईं माता जानकी

महर्षि वाल्मीकि माता सीता और लव-कुश के साथ अयोध्या पहुंचे और माता जानकी की पवित्रता का वर्णन किया। तब प्रभु श्रीराम ने कहा कि यदि सीता स्वयं अपने चरित्र का प्रमाण देंगी, तो वे सब स्वीकार कर लेंगे। इसके बाद माता सीता ने हाथ जोड़कर कहा, “अगर मैं पवित्र हूं और मैंने प्रभु श्रीराम के अतिरिक्त किसी और के बारे में सोचा भी ना हो, तो धरती मां मैं आप में समा जाऊं… यदि मैं सदैव पवित्र रही हूं, तो मुझे अपनी गोद में समा लो. मां मुझे अपने साथ ले चल” इतना कहते ही धरती फट गई और देवी धरा माता सीता को अपने साथ ले गईं।

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असहनीय पीड़ा और विनाश का संकल्प

इस दृश्य ने पूरे राममहल को स्तब्ध कर दिया। माता सीता के वियोग में प्रभु श्रीराम की पीड़ा असहनीय हो उठी। कहा जाता है कि उस क्षण उन्होंने पृथ्वी लोक के विनाश का निश्चय कर लिया। प्रभु राम ने धरती माता से कहा, “हे धरती माता. तुम मेरी सीता को अपने साथ नहीं ले जा सकतीं… यदि तुमने पृथ्वी पर उसी रूप में मेरी सीता को नहीं लौटाया तो मैं पर्वत और वन सहित तुम्हारी समस्त स्थिति को नष्ट कर डालूंगा”

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ब्रह्माजी ने रोका महाविनाश

उसी समय ब्रह्माजी प्रकट हुए और प्रभु श्रीराम को उनके भगवत वैष्णव स्वरूप का स्मरण कराया। ब्रह्माजी के हस्तक्षेप से पृथ्वी का विनाश टल गया। यही कथा विवाह पंचमी को और भी भावुक, रहस्यमयी और आध्यात्मिक बना देती है।

On vivah panchami a moment from the ramayana story when lord rama heartbroken by sitas separation resolved to destroy the earth

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Published On: Jan 22, 2026 | 06:10 PM

Topics:  

  • Lord Ram
  • Mata Sita
  • Ramayan
  • Religion
  • Sanatana Dharma

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