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भोलेनाथ को इसलिये नहीं चढ़ता केतकी का फूल, शिव पुराण में मिलता है कथा का वर्णन

शिवभक्त भगवान को कई तरह के फूल भी अर्पित करते हैं लेकिन एक फूल ऐसा है जिसे शिवजी को अर्पित नहीं किया जाता। शिव पुराण में एक कथा है जिसके अनुसार शिवजी ने केतकी को शाप दिया था कि उसका फूल उनकी पूजा में कभी भी प्रयोग नहीं किया जायेगा। तभी से शिवजी को केतकी का फूल चढ़ाना वर्जित है।

  • Written By: रीना पंवार
Updated On: Jul 21, 2024 | 03:13 PM

(सौजन्य सोशल मीडिया)

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नवभारत डेस्क: भगवान भोलेनाथ की पूजा में शिव भक्त शिवलिंग पर गंगाजल, बेलपत्र, दूध, दही, फल, फूल, भांग, धतूरा समेत कई चीजें अर्पित करते हैं। शिवभक्त भगवान को कई तरह के फूल भी अर्पित करते हैं लेकिन एक फूल ऐसा है जिसे शिवजी को अर्पित नहीं किया जाता। यह है केतकी का फूल। ऐसी मान्यता है कि शिवजी को विशेष रूप से सफेद रंग के फूल प्रिय हैं लेकिन केतकी का फूल सफेद होने के बावजूद भी शिवजी को नहीं चढ़ाया जाता।

इसे लेकर शिव पुराण में एक कथा है जिसके अनुसार शिवजी ने केतकी को शाप दिया था कि उसका फूल उनकी पूजा में कभी भी प्रयोग नहीं किया जायेगा। माना जाता है कि तभी से शिवजी को केतकी का फूल चढ़ाना वर्जित है। यहां हम आपको उसी कथा के बारे में बताने जा रहे हैं जो केतकी और भगवान शिव से जुड़ी है……..

केतकी को लेकर पौराणिक कथा

शिव पुराण के अनुसार एक बार भगवान विष्णु और ब्रह्माजी के बीच इस बात को लेकर विवाद हो गया कि दोनों में से कौन श्रेष्ठ है। दोनों के बीच जब विवाद बहुत ज्यादा बढ़ गया तो समाधान के लिये शिवजी को बीच में आना पड़ा। इस बात का समाधान खोजने के लिये भगवान शिव ने तब एक ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति की और कहा कि जो कोई दोनों में से इसका आदि और अंत खोज निकालेगा वहीं सर्वश्रेष्ठ माना जायेगा। तब ज्योतिर्लिंग का आदि-अंत खोजने के लिये भगवान विष्णु ऊपर की ओर और ब्रह्मा जी नीचे की ओर चले गये। बहुत खोजने पर भी जब भगवान विष्णु को सफलता नहीं मिली तो उन्होंने शिवजी के समक्ष हार मान ली।

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ब्रह्माजी ने शिवजी से बोला झूठ

शिव पुराण की कथा के अनुसार ब्रह्माजी भी शिवलिंग का आदि-अंत खोजने के लिये निकल पड़े लेकिन बहुत कोशिश के बाद भी वे इसे खोज नहीं पाये। परंतु उन्होंने हार नहीं मानी और जीतने के लिये छल का सहारा लिया तथा रास्ते में मिले केतकी के फूल को अपने पक्ष में कर लिया। ब्रह्माजी ने केतकी के फूल को भगवान शिव के सामने झूठ बोलने के लिए तैयार कर लिया। तब केतकी का फूल और ब्रह्माजी शिवजी के सामने पहुंचे और कहा कि उन्हें ज्योतिर्लिंग की शुरुआत मिल गई है। केतकी के फूल ने भी इस बात की झूठी गवाही दे दी।

केतकी को मिला शिवजी से शाप

भगवान शिव जानते थे कि दोनों झूठ बोल रहे हैं इसलिये वे दोनों पर क्रोधित हो गये। क्रोधित शिवजी ने तब ब्रह्माजी का पांचवां सिर काट दिया और उनको पंचमुख से चार मुख बना दिया। तभी से ब्रह्माजी के चार मुख हैं। वहीं, केतकी को शाप दिया कि अब से मेरी पूजा में तुम वर्जित रहोगी। तभी से शिव पूजा में केतकी का फूल अर्पित नहीं किया जाता। ऐसी मान्यता है कि यदि कोई शिव पूजा में केतकी का फूल चढ़ाता है तो इससे वह पाप का भागी बनता है।

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Published On: Jul 21, 2024 | 03:13 PM

Topics:  

  • Shivling Puja

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