भगवान शिव की पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय है निशिता काल, निशिता काल में ही पृथ्वी पर शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे महादेव

भगवान शिव निशिता काल में ही पृथ्वी पर शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। यही कारण है कि भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए निशितकाल को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
भगवान शिव की पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय है निशिता काल, निशिता काल में ही पृथ्वी पर शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे महादेव
महाशिवरात्रि पूजा के लिए निशिता काल सर्वश्रेष्‍ठ (सोशल मीडिया)
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Mahashivratri Nishita Kaal 2025: पूरे देशभर में आज महाशिवरात्रि का महापर्व मनाया जा रहा है। आज सारे शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। श्रद्धालुगण शिवलिंग का अभिषेक कर रहे हैं। जगह-जगह रुद्राभिषेक और शिव जी की पूजा हो रही है। महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान होता है। जो भी श्रद्धालु निश्छल एवं सह्रदय मन से भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करता है उनकी सारी मनोकामना पूरी होती है।

हिंदू धर्म में कोई भी शुभ एवं धार्मिक अनुष्ठानों सहित हर विशेष पर्व, त्योहार पर भगवान की पूजा या अभिषेक करने के लिए शुभ मुहूर्त निकाले जाते है। शुभ मुहूर्त व पवित्र समय में की गई पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में की गई पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

आपको बता दें, महाशिवरात्रि की पूजा के लिए वैसे तो यह पूरा दिन शुभ होता है। महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण करना बेहद पुण्‍यदायी माना जाता है। लेकिन महाशिवरात्रि पर पूजा के लिए निशिता काल को सर्वश्रेष्‍ठ माना गया है। आइए जानते है महाशिवरात्रि पर पूजा के लिए निशिता काल को क्यों सर्वश्रेष्‍ठ माना गया है।

महाशिवरात्रि पर पूजा के लिए निशिता काल सर्वश्रेष्‍ठ

महाशिवरात्रि पर पूजा के लिए निशिता काल सर्वश्रेष्‍ठ माना गया है। कई लोगों के मन में सवाल होगा कि आखिर निशिता काल क्या होता है और क्यों इस काल में पूजा करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, निशिता काल उस समय को कहा जाता है जब रात्रि अपने मध्य में होती है। निशिता काल की अवधि एक घंटे से भी कम की होती है।

पंचांग के अनुसार इसे रात का आठवां मुहूर्त कहा जाता है जो कि ज्योतिषीय गणनाओं के बाद निर्धारित किया जाता है। इस समय पूजा करने पर शांत वातावरण में सभी शक्तियां शीघ्र प्रसन्न होती है।

निशिता काल में ही भगवान शिव प्रकट हुए थे शिवलिंग के रूप में

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव निशिता काल में ही पृथ्वी पर शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। यही कारण है कि भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए निशितकाल को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

आपको बता दें, खास तौर पर शिवलिंग पूजन के लिए निशितकाल शुभ समय माना जाता है। वैसे तो महाशिवरात्रि में शिवपूजन के लिए चारों पहर की पूजा की जाती है। इसलिए महाशिवरात्रि की पूरी रात जागकर चारों प्रहर की पूजा करने का विधान बनाया गया है।

ये है महाशिवरात्रि पर निशित काल पूजा मुहूर्त

इस साल महाशिवरात्रि पर निशिता काल की पूजा का मुहूर्त आज 26 फरवरी की मध्‍यरात्रि 12 बजकर 8 मिनट से रात 12 बजकर 58 मिनट तक केवल 50 मिनट का है।

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