नवरात्रि के तीसरे दिन होगी मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें पूजा विधि और मां का प्रिय भोग भी
Maa Chandraghanta: शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन जगत की देवी मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। इस शुभ अवसर पर साधक भक्ति भाव से देवी मां चंद्रघंटा की पूजा करते हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
क्या है देवी दुर्गा मां चंद्रघंटा का स्वरूप (सौ. सोशल मीडिया)
Maa Chandraghanta Puja vidhi: आज 24 सितंबर 2025 को शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन है। यह दिन पूर्णतया देवी मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है। शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन जगत की देवी मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। इस शुभ अवसर पर साधक भक्ति भाव से देवी मां चंद्रघंटा की पूजा करते हैं। साथ ही मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए व्रत रखते हैं। देवी मां चंद्रघंटा की पूजा करने से सकल मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं। साथ ही जीवन में खुशियों का आगमन होता है।
शास्त्रों के मुताबिक, माता चंद्रघंटा को राक्षसों की वध करने वाला कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि मां ने अपने भक्तों के दुखों को दूर करने के लिए हाथों में त्रिशूल, तलवार और गदा रखा हुआ है। माता चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र बना हुआ है, जिस वजह से भक्त मां को चंद्रघंटा कहते हैं।
मां चंद्रघंटा को दूध से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है, मां को केसर की खीर और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए। पंचामृत, चीनी व मिश्री भी मां को अर्पित करनी चाहिए। आइए जानते हैं देवी चंद्रघंटा के स्वरूप, पूजा विधि से लेकर मंत्र आरती तक सब कुछ
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क्या है देवी दुर्गा मां चंद्रघंटा का स्वरूप
देवी दुर्गा के तीसरे चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत शांतिदायक और कल्याणकारी है। बाघ पर सवार मां चंद्रघंटा के शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। उनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।
10 भुजाओं वाली देवी प्रत्येक हाथ में अलग-अलग शस्त्र से सुशोभित हैं। उनके गले में सफेद फूलों की माला सुशोभित है। यद्यपि वह दुष्टों पर अत्याचार करने और उन्हें नष्ट करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं, फिर भी उनका रूप देखने वाले और उपासक के लिए सौम्यता और शांति से भरा रहता है। अतः, भक्तों के कष्टों का निवारण ये शीघ्र ही कर देती हैं। सिंह इनका वाहन है।
कैसे करें मां चंद्रघंटा का पूजा विधि
. सुबह जल्दी उठें और स्नान-ध्यान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
. देवी की पूजा ईशान कोण में स्वच्छ और पवित्र स्थान पर करें।
. पूजा की शुरुआत में सबसे पहले देशी घी का दीया जलाएं।
. उसके बाद फल-फूल, धूप-दीप और भोग आदि अर्पित करें।
. हिंदू मान्यता के अनुसार माता को लाल रंग प्रिय है। ऐसे में शुभता के लिए मां चंद्रघंटा की पूजा में लाल रंग के वस्त्र अर्पित करें तथा खीर का भोग लगाएं।
. मां दुर्गा का आशीर्वाद पाने के लिए मां चंद्रघंटा के मंत्र का जाप और दुर्गा सप्तशती या फिर दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
. शाम को भी पूजा करें और मां दुर्गा की आरती का पाठ करें।
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मां चंद्रघंटा को अति प्रिय ये चीजें
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा में खीर का भोग अर्पित करना शुभ एवं उत्तम माना जाता है। मां को विशेष रूप से केसर की खीर बहुत पसंद है। इसके अलावा आप लौंग, इलायची, पंचमेवा और दूध से बनी मिठाइयां भी मां को भोग के रूप में अर्पित कर सकते हैं। भोग में मिसरी जरूर रखें और साथ ही पेड़े भी चढ़ा सकते हैं।
