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यूपी में यहां स्थित हैं मां कुष्मांडा देवी का मंदिर, रिसते जल को आंखों में लगाने से होता हैं ये चमत्कार

हिंदू मान्यता के अनुसार, मां कुष्मांडा देवी को ब्रम्हांड की उत्पत्ति करने वाली मां के नाम से जानते हैं उनकी चौथे दिन पूजा करने के कई रोग-दोष दूर हो जाते है। इसके अलावा एक ऐसा मंदिर हैं जिसमें कई रहस्य औऱ चमत्कार छिपे है जिसके बारे में कम लोग ही जानते है।

  • Written By: दीपिका पाल
Updated On: Oct 06, 2024 | 08:42 AM

कानपुर में स्थित हैं मां कुष्मांडा देवी मंदिर (सौ.सोशल मीडिया)

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Maa Kushmanda Devi Mandir: शारदीय नवरात्रि का दौर चल रहा है जिसमें आज का दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा देवी को समर्पित होता है। हिंदू मान्यता के अनुसार, मां कुष्मांडा देवी को ब्रम्हांड की उत्पत्ति करने वाली मां के नाम से जानते हैं उनकी चौथे दिन पूजा करने के कई रोग-दोष दूर हो जाते है। इसके अलावा एक ऐसा मंदिर हैं जिसमें कई रहस्य औऱ चमत्कार छिपे है जिसके बारे में कम लोग ही जानते है। चलिए जानते हैं ऐसे ही एक कुष्मांडा मंदिर के बारे में जहां पर दर्शन करने से भक्तों को आशीर्वाद मिलता है।

उत्तरप्रदेश में यहां स्थित हैं मंदिर

बताते चले कि, यह चमत्कारी मां कुष्मांडा देवी का मंदिर उत्तरप्रदेश के कानपुर जिले में घाटमपुर कस्बे में स्थित है। जहां पर माता की पिंडी यानि मूर्ति से पानी रिसता है जिसे काफी चमत्कारी माना गया है कहते हैं जो भक्त मां कुष्मांडा देवी की पूजा बड़े ही विधि-विधान से करते हैं उनके आंखों के विकार दूर हो जाते हैं लोगों की मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति 6 महीने तक मां के जल को अपनी आंखों मे लगाए तो उसकी खोई रोशनी तक वापस आ सकती है। इस चमत्कारी मंदिर में मां कुष्मांडा देवी पिंडी के रुप में दो मुख के साथ विराजित हैं जिसके आदि औऱ अंत का आधार अब तक नहीं मिला है। कहते हैं यहां माता की मूर्ति लेटी हुई अवस्था में नजर आती है। उनकी पिंडी से पानी रिसता हैं जो आंखों के सभी रोगों को दूर करने में मदद करता है। इस मान्यता के चलते ही भक्त बड़ी संख्या में यहां पहुंचते है।

ये भी पढ़ें- सिर्फ नवरात्रि के 9 दिन खुलता है माता का मंदिर, यहां के रहस्य जान कर आप रह जाएंगें दंग

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जानिए क्या हैं मंदिर की खासियत

यहां पर मंदिर की बात की जाए तो, मां कुष्मांडा देवी की यहां प्रतिमा चतुष्टय आकार की मिलती हैं जो विश्व की इकलौती इस प्रकार की मूर्ति हैं। इसके चलते ही नवरात्रि के चौथे दिन बड़ी संख्या में भक्त यहां पर आते है और मां के श्रृंगार के साथ भोग के लिए कच्चे चने चढ़ाते हैं. यहां कुम्हड़ा की बलि भी चढ़ाई जाती है जो माता कुष्मांडा को सबसे प्रिय होता है।

इस मंदिर की खासियत यह हैं कि, यहां पुजारी की जगह पूजा मालिन (घर घर फूल बाटने का काम करने वाली) करती है यही मां कुष्मांडा देवी का श्रंगार करती, वस्त्र पहनती और भोग लगती है, यह परंपरा यहां सैकड़ों सालों से चल रही है। मंदिर की मालिन कमला देवी बताती हैं कि, रोजाना सैकड़ों लोग दर्शन के लिए आते हैं और माता की प्रतिमा से रिसते जल को आंखों पर लगाते हैं कहते हैं, आंख में माड़ और मोतियाबिंद की स्थिति में यह फायदेमंद माना जाता है।

मां कुष्मांडा देवी (सौ.सोशल मीडिया)

जानिए मंदिर के पीछे की कहानी

इस मां कुष्मांडा मंदिर को लेकर इतिहास पुराना हैं जिसमें दो मुख वाली कुष्मांडा देवी की मूर्ति शैली मराठा कालीन मिलती हैं जिसका संबंध दूसरी से पांचवी शताब्दी के बीच का माना जाता है। कहा जाता हैं कि, इस मंदिर की खोज करने वाले कोहरा नामक ग्वाले थे।उन्होंने ही सन 1330 में इस स्थान पर मां की मढ़िया का निर्माण करवाया था, जिसके बाद सन 1890 में एक व्यवसायी ने इस मंदिर का नये सिरे से जीणोद्धार करवाया गया है।

इस मंदिर को लेकर एक कहानी कहती हैं कि, इस मंदिर के पास पहलें जंगल हुआ करता था जिसमें पालतू जानवरों को क्षेत्र में चराने के लिए ले जाते थे। एक गाय हर दिन इस स्थान में आ कर अपना दूध गिरा देती थी. इस गाय का मालिक परेशान हो गया कि मेरी गाय का दूध हर दिन गायब कहा हो जाता है और उसने अपनी गाय का पीछा की तो उसने गाय को इसी स्थान में दूध गिरते देखा. उसने जब इस स्थान की खुदाई की तो मां की ये मूर्ति मिली और उसने इस मूर्ति को निकलना चाह तो वो खोदते खोदते हार गया जिसके बाद उसने मढ़िया बना दी। माता की पूर्ति को निकाला नहीं जा सका यह एक चमत्कार यह भी होता था कि, जितने दिन खुदाई करने के बाद फिर से वहीं से खुदाई शुरु हो जाती।

Miraculous temple of maa kushmanda devi is located in kanpur up

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Published On: Oct 06, 2024 | 08:42 AM

Topics:  

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