Cigarette Offering to Lord Shiva: इस मंदिर में महादेव को चढ़ाई जाती है सिगरेट, जानें क्यों है यह अनोखी परंपरा

Lutru Mahadev Temple History: हिमाचल के इस शिव मंदिर में भगवान शिव को दूध और बेलपत्र नहीं चढ़ाया जाता है। यह महादेव को सिगरेट और बीड़ी चढ़ाने की अनोखी परंपरा है। जानें इस मंदिर का इतिहास।
Lutru mahadev temple cigarette offering lord shiva himachal pradesh
लुटरू महादेव मंदिरफोटो.सोशल मीडिया
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Lutru Mahadev Temple: हिमाचल प्रदेश की शांत पहाड़ियों में एक ऐसा मंदिर स्थित है, जहां धार्मिक परंपराएं अपने अनोखे रूप में देखने को मिलती हैं। हिमाचल के सोलन जिले के लुटरू महादेव मंदिर में श्रद्धालु भगवान शिव को धतूर और बेलपत्र की जगह जलती हुई सिगरेट और बीड़ी अर्पित करते हैं।

दूध, बेलपत्र या फूल जैसी पारंपरिक चीजों की जगह यहां शिवलिंग की प्राकृतिक दरारों में जलती हुई सिगरेट रखी जाती है। कहा जाता है कि कुछ समय बाद शिवलिंग के छिद्रों से धुआं निकलता हुआ दिखाई देता है। आस्था, रहस्य और स्थानीय लोककथाओं का यह अनोखा मेल देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों, श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं के आकर्षण का केंद र बना रहता है।

लुटरू महादेव मंदिर में भगवान शिव को चढ़ाई जाती है सिगरेट

लुटरू महादेव मंदिर सोलन जिले के अर्की क्षेत्र की एक खूबसूरत पहाड़ी पर स्थित है। यह मंदिर प्राकृतिक गुफा के भीतर बना हुआ है। इसका निर्माण वर्ष 1621 ईस्वी में तत्कालीन बघाट रियासत के राजा पृथ्वी सिंह ने करवाया था। मंदिर का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी काफी खास है। मंदिर की सबसे प्रमुख विशेषता यहां मौजूद प्राकृतिक शिवलिंग है। शिवलिंग की संरचना में पाइप जैसी प्राकृतिक खोखली जगहें और छोटे-छोटे छिद्र हैं, जिनसे होकर हवा का प्रवाह होता है।

भगवान शिव को सिगरेट क्यों चढ़ाते हैं भक्त?

भगवान शिव को सिगरेट चढ़ाने की परंपरा स्थानीय धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है। भक्तों का विश्वास है कि भोलेनाथ सच्ची श्रद्धा से चढ़ाई गई किसी भी चीज को स्वीकार कर लेते हैं। हिंदू मान्यताओं में भगवान शिव को तपस्वी और योगी के रूप में देखा जाता है। समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को ग्रहण करने के कारण उन्हें नीलकंठ भी कहा जाता है। इसी वजह से स्थानीय मान्यताओं में शिव को सांसारिक बुराइयों और नकारात्मकता को अपने भीतर समाहित करने वाले देवता के रूप में भी देखा जाता है।

इस परंपरा से जुड़ी मान्यता के अनुसार, जलती हुई सिगरेट चढ़ाना व्यक्ति की बुरी आदतों, नकारात्मक विचारों और सांसारिक इच्छाओं को भगवान शिव को समर्पित करने का प्रतीक है। जब जलती हुई सिगरेट को शिवलिंग में मौजूद प्राकृतिक छिद्र में रखा जाता है, तो उसमें से धुआं निकलता दिखाई देता है।

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शिवलिंगफोटो.सोशल मीडिया

शिव मंदिर की परंपरा के पीछे क्या है कहानी?

स्थानीय लोककथा के अनुसार, भगवान शिव ने राजा पृथ्वी सिंह को स्वप्न में दर्शन दिए थे। इसके बाद राजा ने इस गुफा की खोज की और यहां मंदिर का निर्माण करवाया। हालांकि, सिगरेट चढ़ाने की परंपरा नई बताई जाती है। स्थानीय कहानी के अनुसार, किसी चरवाहे या साधु ने शिवलिंग की प्राकृतिक दरारों में जलती हुई सिगरेट रख दी थी।

लोगों ने देखा कि गुफा में मौजूद प्राकृतिक छिद्रों से हवा आने के कारण सिगरेट बुझने के बजाय पूरी तरह जल गई। इस घटना को स्थानीय लोगों ने भगवान शिव द्वारा चढ़ावा स्वीकार करने का चमत्कार समझा और धीरे-धीरे यह घटना एक अनोखी धार्मिक परंपरा में तब्दील हो गई।

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सिगरेट चढ़ाने को लेकर क्या है मान्यता?

लुटरू महादेव मंदिर में पूजा करने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस विशेष प्रकार का चढ़ावा मनोकामना पूरी होने, मानसिक शांति और परेशानियों से राहत दिलाता है।

मंदिर आने वाले श्रद्धालु आमतौर पर स्थानीय दुकानों से सिगरेट या बीड़ी का पैकेट खरीदते हैं। इसके बाद एक सिगरेट या बीड़ी जलाकर भगवान शिव के सामने प्रार्थना करते हैं और उसे शिवलिंग के प्राकृतिक छिद्र में रखते हैं।

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