

Sawan Shivling Puja: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए सबसे शुभ एवं पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने लाखों श्रद्धालु मंदिरों में जाकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान शिव यानी भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव इतने भोले हैं कि वे सिर्फ एक लोटा जल चढ़ाने से ही बहुत खुश हो जाते हैं। हालांकि, जब हम अपने धर्म-ग्रंथों पर नजर डालते हैं तो शिवलिंग पूजा से जुड़े कई नियम बताए गए हैं। ऐसे में कई लोगों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि क्या सूर्यास्त के बाद या रात में भी शिवलिंग पर जल चढ़ा सकते है आइए जानते हैं-
धर्मशास्त्रों और पुराणों के अनुसार, भगवान शिव ऐसे देव हैं जिनकी पूजा दिन और रात दोनों समय कर सकते हैं। सावन में भक्त अपनी सुविधा और पूजा के शुभ समय के अनुसार संध्या के बाद भी शिवलिंग का जलाभिषेक कर सकते हैं।
खासतौर पर प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करना विशेष महत्व बताया गया हैं। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से भक्तों को विशेष कृपा प्राप्त होती हैं। इसलिए अगर किसी कारण से सुबह शिवलिंग का जलाभिषेक नहीं कर पाए हैं तो शाम के समय भी विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं।
रात्रि में पूजा करने से पहले स्नान कर स्वच्छ और सात्विक वस्त्र धारण करें। शिवलिंग पर शुद्ध जल या गंगाजल अर्पित करें। इसके साथ बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प, चंदन और सफेद पुष्प अर्पित किए जा सकते हैं।
बेलपत्र चढ़ाते समय यह ध्यान रखें कि वह खंडित ना हो और उसकी चिकनी सतह शिवलिंग की ओर रहे। पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप, शिव चालीसा, रुद्राष्टक या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
धर्माचार्यों के अनुसार, सावन में रात्रि के समय किया गया जलाभिषेक भी पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से किया जाए तो भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
हालांकि, अगर किसी विशेष मंदिर की परंपरा या समय-सीमा अलग हो, तो उसी का पालन करना उचित माना जाता है। सनातन परंपरा में श्रद्धा, पवित्रता और नियमपूर्वक की गई शिवभक्ति को ही सबसे अधिक महत्व दिया जाता है।