Tulsi Puja: रोज तुलसी में जल चढ़ाना भी पड़ सकता है भारी! इन गलतियों से नाराज हो सकती हैं माता लक्ष्मी

Tulsi Puja Niyam : रोज तुलसी में जल चढ़ाना शुभ माना जाता है, लेकिन कुछ गलतियों के कारण माता लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं। जानिए तुलसी पूजा के दौरान किन नियमों का ध्यान रखना जरूरी है।
Tulsi Puja Mistakes
तुलसी पूजा नियम (सौ.AI)
Updated on

Tulsi Puja Mistakes : तुलसी के पौधे को सनातन धर्म में बेहद पवित्र और पूजनीय माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जिस घर में रोजाना तुलसी की पूजा होती है, वहां सदैव सुख-शांति और मां लक्ष्मी का वास रहता है और भगवान विष्णु को भी तुलसी अत्यंत प्रिय है। यही कारण है कि अधिकांश घरों में रोज सुबह तुलसी की पूजा की जाती है और जल अर्पित किया जाता है।

हालांकि कई लोग रोज तुलसी में पानी तो डालते हैं, लेकिन अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं मानी जातीं हैं। मान्यता है कि इन भूलों से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता हैं। ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि तुलसी में जल अर्पित करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

किस दिन नहीं चढ़ाना चाहिए जल?

रविवार का दिन

मान्यता है कि रविवार के दिन तुलसी के पौधे में जल नहीं देना चाहिए, क्योंकि इस दिन तुलसी माता भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।

एकादशी तिथि

एकादशी के पवित्र अवसर पर भी तुलसी में जल अर्पित करने की मनाही होती है, हालांकि इस दिन शाम के समय दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है।

चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण

ग्रहण काल के दौरान या सूतक काल में भी तुलसी को स्पर्श करने और जल चढ़ाने से बचना चाहिए।

बिना स्नान किए तुलसी को जल देना

मान्यता है कि तुलसी पूजा से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए। शुद्ध मन और श्रद्धा के साथ पूजा करने को अधिक शुभ माना गया है।

जरूरत से ज्यादा पानी डालना

धार्मिक मान्यता के साथ-साथ पौधे की देखभाल भी जरूरी है। रोज अत्यधिक पानी डालने से तुलसी की जड़ें खराब हो सकती हैं। मौसम के अनुसार उतना ही पानी दें, जितनी पौधे को आवश्यकता हो।

सूखे या गंदे स्थान पर तुलसी रखना

तुलसी का पौधा हमेशा साफ-सुथरे और खुले स्थान पर रखना शुभ माना जाता हैं। पौधे के आसपास गंदगी, कचरा या टूटे-फूटे सामान रखने से बचें। इससे पौधे की अच्छी देखभाल भी होती है और धार्मिक दृष्टि से भी इसे उचित माना जाता है।

ज्योतिष शास्त्र में तुलसी केवल एक पौधा नहीं बल्कि सनातन परंपरा में श्रद्धा और सात्विकता का प्रतीक है। कहा जाता हैं कि तुलसी की पूजा करते समय नियमों से अधिक महत्व श्रद्धा और शुद्ध भावना का होता है।

सुबह स्नान के बाद जल अर्पित करना, दीपक जलाना और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" या "ॐ तुलस्यै नमः" मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। साथ ही वे यह भी कहते हैं कि पौधे की उचित देखभाल करना भी उतना ही आवश्यक है जितना उसकी पूजा करना है।

Tulsi Puja Mistakes
हरियाली तीज की पूजा में छिपे हैं ये 5 खास उपाय, पति-पत्नी के रिश्ते पर बना रहेगा शिव-पार्वती का रक्षा कवच
Navbharat Live
navbharatlive.com