धनतेरस पूजा की पूरी विधि जानिए, ऐसे करें माता मां लक्ष्मी, कुबेर देव और भगवान धन्वंतरि की पूजा
Dhanteras puja: धनतेरस की पूजा हमेशा प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि में की जाती है और इस दिन खरीदारी करने का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन खरीदी गईं चीजों में 13 गुणा वृद्धि होती है।
- Written By: सीमा कुमारी
क्या रहने वाला है धनतेरस पूजा शुभ मुहूर्त 2025 (सौ.सोशल मीडिया)
Dhanteras shopping muhurat 2025:पूरे देशभर में आज धनतेरस का त्योहार मनाया जा रहा है। इस दिन का हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व होता है। यह पर्व हर वर्ष कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। धनतेरस यानी धन त्रयोदशी दीपावली पर्व की शुरुआत मानी जाती है।
आपको बता दें, यह दिन केवल खरीदारी का ही नहीं, बल्कि घर में सुख-समृद्धि, आरोग्य और सकारात्मकता लाने का भी दिन होता है। धनतेरस की पूजा हमेशा प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि में की जाती है और इस दिन खरीदारी करने का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन खरीदी गईं चीजों में 13 गुणा वृद्धि होती है। आइए जानें इस दिन की पूजा विधि को सही तरीके के बारे में-
जानिए क्या रहने वाला है धनतेरस पूजा शुभ मुहूर्त 2025
कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को शाम के समय प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व होता है।
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शुभ समय:
सूर्यास्त के बाद 45 मिनट से लेकर लगभग 2 घंटे तक पूजा करना शुभ माना जाता है।
पूजन मुहूर्त:
शाम 7 बजकर 15 मिनट से रात 8 बजकर 19 मिनट तक।
दिशा:
पूजन उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके करें।
ये है धनतेरस के लिए पूजा सामग्री
भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की मूर्ति या चित्र
गंगाजल और साफ पानी
हल्दी, कुमकुम, चंदन, इत्र
ताज़ा फूल और फूलों की माला
कलावा (मौली) और जनेऊ
पूजा चौकी और लाल/पीले रंग का कपड़ा
कलश, आम के पत्ते, नारियल
फल, खील, बताशे, मिठाई और मेवे
अक्षत (चावल), साबुत धनिया और दालें
13 मिट्टी के दीपक, गाय का घी, कपूर, अगरबत्ती
सोने/चांदी के सिक्के या नई धातु की वस्तुएँ
नई झाड़ू (मां लक्ष्मी का स्वागत)
रंगोली पाउडर (सजावट के लिए)
कैसे करें धनतेरस पर मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा
घर और पूजा स्थान की सफाई करें
मुख्य द्वार और पूजा स्थल को अच्छे से साफ करें और रंगोली बनाएं।
पूजा चौकी सजाएं
उत्तर-पूर्व दिशा में एक चौकी रखें, उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं।
कलश की स्थापना करें
एक तांबे या मिट्टी का कलश लें, उसमें गंगाजल और साफ पानी भरें, आम के पत्ते डालें और ऊपर नारियल रखें।
देवताओं की प्रतिमाएं रखें
भगवान धन्वंतरि, देवी लक्ष्मी, भगवान कुबेर और गणेश जी की मूर्तियाँ या चित्र स्थापित करें।
षोडशोपचार पूजा करें
हल्दी, कुमकुम, चंदन, अक्षत, फूल, दीप, धूप, मिठाई और दक्षिणा से पूजा करें।
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दीपक जलाएं
पूजा के समय गाय के घी का बड़ा दीपक और 13 छोटे दीये जलाएं।
भोग और आरती करें
खील, बताशे, मेवे और मिठाइयों का भोग लगाएं, फिर आरती करें।
