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मृत्यु के बाद भी मां से मिलने लौटे कर्ण, जानिए क्यों एक रात के लिए फिर जीवित हुए महाभारत के दानवीर

Mahabharat का युद्ध सिर्फ अस्त्र-शस्त्रों का नहीं था, बल्कि त्याग, अपमान, धर्म और करुणा की भी कहानी था। इस महाकाव्य का सबसे करुण पात्र कर्ण माना जाता है। लेकिन आप जानते है महाभारत का छुपा रहस्य।

  • Written By: सिमरन सिंह
Updated On: Jan 28, 2026 | 06:33 PM

Karan (Source. Pinterest)

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Mahabharata Karna Mystery: महाभारत का युद्ध सिर्फ अस्त्र-शस्त्रों का नहीं था, बल्कि त्याग, अपमान, धर्म और करुणा की भी कहानी था। इस महाकाव्य का सबसे करुण पात्र कर्ण माना जाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि महाभारत युद्ध में वीरगति को प्राप्त करने के बाद भी कर्ण को एक दिन के लिए फिर से जीवन मिला था। आखिर क्यों और कैसे हुआ यह चमत्कार? जानिए पूरी पौराणिक कथा।

जन्म से ही संघर्षों में घिरे थे कर्ण

कर्ण का जन्म अविवाहित कुंती के गर्भ से हुआ था। लोकलाज के भय से कुंती ने नवजात कर्ण को त्याग दिया, जिससे उन्हें जीवनभर समाज में न तो सम्मान मिला और न ही अपना वास्तविक अधिकार। सूतपुत्र कहलाने के कारण उनका अपमान होता रहा, जबकि वे अर्जुन के समान ही नहीं, कई बार उससे भी अधिक पराक्रमी योद्धा थे। यही वजह है कि कर्ण के बिना महाभारत की कथा अधूरी मानी जाती है।

वचन, त्याग और महादान की मिसाल

कर्ण न केवल महान योद्धा थे, बल्कि वचन निभाने में भी अद्वितीय थे। उन्होंने अपनी मां कुंती को वचन दिया था कि वह अर्जुन को छोड़कर किसी अन्य पांडव पर बाण नहीं चलाएंगे। इसके अलावा दानवीर कर्ण ने इंद्र के मांगने पर अपने कवच और कुंडल तक दान कर दिए, जबकि उन्हें ज्ञात था कि यही उनकी रक्षा का सबसे बड़ा साधन हैं।

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युद्ध के बाद मां की अधूरी इच्छा

महाभारत युद्ध समाप्त होने के कई वर्षों बाद कुंती के मन में एक पीड़ा रह गई थी अपने पुत्र कर्ण को अंतिम बार देखने की। इसी इच्छा को लेकर कुंती महर्षि वेदव्यास के पास पहुंचीं और उनसे कर्ण के दर्शन की प्रार्थना की। कुंती की व्यथा सुनकर वेदव्यास ने उन्हें सांत्वना दी और एक विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया।

गंगा तट पर हुआ अद्भुत चमत्कार

महर्षि वेदव्यास के आवाहन पर सभी लोग गंगा तट पर एकत्रित हुए। रात के समय वेदव्यास के मंत्रोच्चार से महाभारत युद्ध में मारे गए सभी योद्धा गंगा तट पर प्रकट हुए। उसी दिव्य क्षण में कर्ण भी वहां प्रकट हुए और उनका अपनी मां कुंती से मिलन हुआ। यह मिलन सिर्फ एक रात के लिए था, लेकिन इसने कुंती के जीवन का सबसे बड़ा दुख शांत कर दिया।

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कथा का भावार्थ

यह प्रसंग दर्शाता है कि चाहे जीवन में कितना भी अपमान क्यों न सहना पड़े, सत्य, त्याग और करुणा कभी नष्ट नहीं होते। कर्ण का पुनर्जीवन मां-बेटे के रिश्ते, पश्चाताप और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है।

Disclaimer: यहां पर दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं और धर्मग्रंथों से ली गई हैं।

Karna returned to meet his mother after death generous hero of the mahabharata came back to life for one night

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Published On: Jan 28, 2026 | 06:33 PM

Topics:  

  • Karan Arjun
  • Mahabharat
  • Religion
  • Sanatana Dharma
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