गणगौर पूजा(सौ.सोशल मीडिया)
Gangaur Puja Mistakes To Avoid:अखंड सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक गणगौर का पर्व राजस्थान का मुख्य पर्व है। जो हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को देश के विभिन्न हिस्सों में गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी इसे अलग-अलग रूप में मनाया जाता है।
हिन्दू लोक मान्यता के मुताबिक, इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और कठिन व्रत का पालन करती हैं। वहीं, जब इस पर्व को लेकर कुछ ही दिन रह गए हैं, तो आइए इससे जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
गणगौर व्रत के दिन मांस-मछली या नशे का सेवन करने से बचें। साथ ही, किसी के लिए भी अपशब्द या कड़वे शब्दों का प्रयोग न करें।
बताया जाता है कि, महिलाओं को दिन में सोने से बचना चाहिए, क्योंकि यह व्रत पार्वती और शिव की भक्ति में समर्पित होता है।
गणगौर पूजा में माता गौरी को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करना बहुत जरूरी है। इसमें कमी या लापरवाही न करें।
इस पावन दिन पर किसी भी गरीब या याचक को खाली हाथ घर से न जाने दें।
व्रत के दौरान मन और शरीर की शुद्धि बहुत महत्वपूर्ण है। तामसिक वस्तुओं का त्याग करें।
16 दिनों तक चलने वाली इस पूजा में माता पार्वती और भगवान शिव की मिट्टी की मूर्ति स्थापित कर विधि-विधान से पूजा करें।
विवाहित महिलाएं अपनी सास या बुजुर्गों को सुहाग की सामग्री भेंट अवश्य करें।
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गणगौर व्रत हिंदू धर्म में विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत माता गौरी (पार्वती) और भगवान शिव को समर्पित होता है, जो सुखी वैवाहिक जीवन और प्रेम के प्रतीक हैं।
अविवाहित लड़कियां इस व्रत को अच्छे और मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए रखती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और दांपत्य सुख के लिए गणगौर पूजा करती हैं।
इस व्रत से जीवन में सुख-समृद्धि, सौभाग्य और खुशहाली आती है। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन और विधि-विधान से की गई गणगौर पूजा से माता गौरी प्रसन्न होकर अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
यह पर्व खासतौर पर राजस्थान और उत्तर भारत के कई हिस्सों में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है, जहां महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा पहनकर पूजा और उत्सव में भाग लेती हैं।